पंचायत कोटली शाहदौला पंचायत भवन के गेट पर लगा ताला व गंदगी का आलम
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आरएस पुरा। उपजिले में तीन ब्लाक होने पर कई पंचायतों में सरपंचों व पंचों के लिए भवन नहीं है। ग्राम सभाओं के लिए सरपंच चौपाल लगा ग्राम सभाएं करनी पड़ती है। दस वर्ष पूर्व पंचायत के चुनाव कराए जाने पर ग्रामीण विकास विभाग की तरफ से कई नई पंचायतों का गठन किया गया। वर्ष 2018 में पंचायत के चुनाव होने पर कई गांव में नई पंचायतों का गठन किया गया। इसके बावजूद आज भी कई गांव में पंचायत घर का निर्माण नहीं हो पाया। इसके चलते कई सरपंच अपने घरों या गांव में किसी स्थान पर चौपाल लगा पंचायत के कार्य करने के लिए मजबूर हैं।
जिन गांव में पंचायत भवन हैं वहां उनका रख रखाव बेहतर नहीं है। अब भवन जर्जर हालत में होने पर इनको प्रयोग में नहीं लाया जा रहा। सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में पंचायती राज को मजबूत बनाए जाने के लिए बनाई योजनाओं पर कार्य कराए जाने के लिए कहा जाता है। हालत यह है कि वहां पर पंचायत भवन ही नहीं। पूर्व सरपंच किशोर कुमार का कहना है कि दिन प्रति दिन बेरोजगारी में बढ़ोतरी हो रही है। सरकार द्वारा पंचायत भवनों में एक कर्मी को नियुक्त नहीं किया जा रहा जो भवनों का रख-रखाव कर सके।
बन सुल्तान पंचायत के पूर्व सरपंच देवेंद्र कुमार शर्मा का कहना है कि पहले गांव की एक पंचायत थी, जिसका भवन आज तक नहीं बन पाया। इस बार दो पंचायतें बनी हैं लेकिन भवन एक पंचायत के पास भी नहीं है। ऐसे में कैसे पंचायत के जनप्रतिनिधि ग्रामसभा लगाएं। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले हर गांव की पंचायत में भवन निर्माण कराना चाहिए। पूर्व सरपंच ओम प्रकाश का कहना है कि पंचायती राज को मजबूती से लागू किए जाने के लिए हर गांव में पंचायत भवन का निर्माण कराए जाने के साथ एक लाइब्रेरी खोली जानी चाहिए ताकि गांव के बच्चे अपनी जरूरत के मुताबिक पुस्तकें का अध्ययन कर सकें।
कल्याणा पंचायत के पूर्व सरपंच राज कुमार भगत का कहना है कि पंचायत का चुनाव एक वर्ष बीत जाने के बाद अभी तक राज्य सरकार द्वारा अदालती कमेटियों का गठन नहीं किया गया। हर पंचायत की ओर से संबंधित ब्लाक में अदालती कमेटियों का गठन करने के लिए पैनल होने पर सरकार की तरफ से अभी तक इसके लिए अधिसूचना जारी नहीं की गई।