बारिश के बाद पुलवामा में लहलहाते धान के खेत। संवाद
पुलवामा। भीषण गर्मी के कारण कश्मीर में मुरझा रही धान की फसल को बारिश के रूप में संजीवनी मिल गई है। सप्ताह भर की बारिश से धान की फसल लहलहाने लगी है। नदियों, नहरों और नालों में जल स्तर बढ़ने के साथ, कम पानी की उपलब्धता के कारण बंद पड़े सिंचाई पंप स्टेशन अब फिर से काम करने लगे हैं। इससे किसानों के चेहरे खिल गए। उन्हें अच्छी फसल की उम्मीद है।
अवंतीपोरा के किसान मोहम्मद शफी ने कहा कि भीषण गर्मी से फसल खराब होने की चिंता सता रही थी। धान के खेतों में दरारें पड़ गई थीं। लेकिन हाल ही में हुई बारिश किसी वरदान से कम नहीं है। मुरझा रही धान की फसल फिर से लहलहाने लगी है।
शोपियां के एक फल उत्पादक रज़ाक मलिक ने कहा, हम अलग-अलग तरीकों से बागों की सिंचाई पर भारी खर्च कर रहे थे, लेकिन पूरे बाग की सिंचाई नहीं कर पा रहे थे। बारिश सही समय पर हुई और यह हमारे लिए बड़ी राहत की बात है।
बडगाम के किसान बशीर अहमद ने कहा, बरसात का हमें बेसब्री से इंतज़ार था। और समय पर बरसात होने से हमारी मुश्किल खत्म हो गई। वहीं कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश सूखे से हुए नुकसान की पूरी तरह से भरपाई नहीं कर सकती, लेकिन यह निश्चित रूप से फसलों की स्थिति को स्थिर करने और मिट्टी की नमी को बहाल करने में मदद करेगी।
कृषि वैज्ञानिक ने कहा, सूखे की मार धान और बागवानी, दोनों क्षेत्रों में दिखाई दे रही थी। इस समय बारिश बेहद ज़रूरी थी। इस बारिश ने जलाशयों को फिर से भर दिया है और सिंचाई कार्यक्रम को बहाल करने में मदद की है। इसने कुछ हद तक भूजल की उपलब्धता को भी बढ़ाया है।
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, झेलम और लिद्दर जैसी प्रमुख नदियों और नालों में जल स्तर बढ़ गया है, जिससे सिंचाई पंप स्टेशनों का संचालन फिर से शुरू हो गया है।