आपको जानकार हैरानी होगी कि कभी जम्मू शहर के बीचों बीच ऐतिहासिक रेल ट्रैक हुआ करता था जो जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान के सियालकोट के साथ जोड़ा करता था।
यह ऐतिहासिक रेल ट्रैक बिक्रम चौक में हुआ करता था जहां पर आज राज्य परिवहन निगम की वर्कशाप चल रही है साथ ही कला केंद्र भी मौजूद है।
वर्कशाप और कला केंद्र के स्थापित किये जाने के बाद से ऐतिहासिक रेल ट्रैक का अस्तित्व खो सा गया है।
केवल दो स्टॉपेज में पहुंचे थे पाकिस्तान
आर एस पुरा के सतराइयां गांव के रहने वाले डा. जरनैल सिंह ने बताया कि देश विभाजन से पहले बिक्रम चौक में स्थित पुराने रेल ट्रैक से सियालकोट के लिए ट्रेन चला करती थी जो व्यापार के साथ आवाजाही के तौर पर इस्तेमाल हुआ करती थी।
उन्होंने बताया कि बिक्रम चौक पर पुराने रेल ट्रैक से लेकर सियालकोट तक जाने के दौरान बीच में दो स्टेशन पड़ते थे जिनमें से एक आरएस पुरा (रनबीर सिंह पुरा) और दूसरा सुचेतगढ़ हुआ करता था।
जहां से चलने वाली ट्रेन से आरएस पुरा के आस-पास स्थित गांवों से गन्नों को सियालकोट स्थित चीनी की मिल तक पहुंचाया जाता था।
'मौसी के घर जाया करती थी'
वहीं सतराईंया गांव की रहने वाली बुजुर्ग दुर्गी देवी ने बताया कि उन्हें याद है वह अपने माता-पिता के साथ वह आरएस पुरा से ट्रेन पर बैठकर सियालकोट में अपनी मौसी के घर जाया करती थी।
उन्होंने बताया कि देश के विभाजन के दौरान जहां पर कुछ ट्रेनें चली थी लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया।
देश विभाजन से पहले के मौजूद रेल ट्रैक के खो रहे अस्तित्व को बचाने के लिए कवायद की जानी चाहिए थी लेकिन कुछ भी नहीं किया।
इतिहास से रूबरू करवाता है ये ट्रैक
दुर्गी देवी ने कहा यही तो यादगार चीजें हैं जो आने वाली पीढ़ी को इतिहास से रूबरू करवाती है।
ऐसे में पुरातत्व विभाग और राज्य सरकार की जिम्मेदारी बनती थी कि देश के पुरातत्व और ऐतिहासिक स्थल का संरक्षण कर उसे पर्यटन स्थल के तौर पर स्थापित करे लेकिन यह रेल ट्रैक पुरातत्व विभाग और राज्य सरकार की अनदेखी का शिकार हो रहा है।