- जम्मू रेल मंडल की घोषणा के नौ और आधिकारिक दर्जा मिलने के तीन महीने बाद की स्थिति
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू को रेलवे मंडल का दर्जा मिलने के बाद भले ही ट्रेन परिचालन में नई रफ्तार आई हो लेकिन कर्मचारियों की कमी अब भी बड़ी चुनौती है। छह जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू को नया रेलवे मंडल घोषित किया था जबकि जून में इसे औपचारिक दर्जा भी मिला लेकिन कर्मियों की कमी अभी तक है।
जम्मू रेल मंडल में चार हजार से अधिक कर्मचारियों की कमी है। उत्तर रेलवे के विभिन्न रेल मंडल से पांच हजार कर्मियों ने तबादले की अर्जी दी है। बावजूद इसके प्रक्रिया गति नहीं पकड़ रही। जम्मू मंडल में 12 हजार के करीब कर्मचारी काम करेंगे। वर्तमान में जम्मू के अधीन ढाई हजार व कश्मीर में करीब चार हजार रेलकर्मी काम कर रहे हैं। अब हिमाचल प्रदेश में तैनात तीन हजार के करीब कर्मचारी भी जम्मू मंडल के अधीन हो गए हैं। इसके अलावा भी कर्मियों की कमी है। इसको पूरा करने के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। हालांकि इस बीच मंडल में दो वंदे भारत ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। कटड़ा से श्रीनगर और अमृतसर से कटड़ा के बीच वंदे भारत दौड़ रही है। श्रीनगर से दिल्ली के बीच रेलवे पार्सल ट्रेन की सुविधा भी शुरू हुई। इन पहलों से यात्रियों और व्यापारियों को बड़ी राहत जरूर मिली है।
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अक्तूबर से जम्मू-श्रीनगर के
बीच वंदे भारत चलाने का दावा
रेलवे अधिकारियों के अनुसार जम्मू से श्रीनगर के बीच सीधी वंदे भारत ट्रेन चलाने की योजना तैयार है। जम्मू रेलवे के यार्ड की रिमॉडलिंग का काम अभी अधूरा है। स्टाफ की कमी भी चुनौती है। इसके कारण ट्रेन परिचालन नहीं हो रहा है। रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि उनपर काम का दबाव बढ़ा है जिससे सुचारु संचालन में कठिनाई बनी रहती है। चार हजार कर्मचारियों में तकनीकी, परिचालन और प्रशासनिक स्टाफ शामिल है।
जम्मू रेलवे स्टेशन पर अभी काम चल रहा है। अभी यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि अक्तूबर से जम्मू-श्रीनगर के बीच वंदे भारत चलेगी या नहीं। कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए मांगे आवेदन वाली प्रक्रिया भी आगे बढ़ी है। विभाग में आवंटन सहित अन्य काम चल रहा है। उम्मीद है जल्द कर्मचारी आएंगे।
- विवेक कुमार, मंडल रेल प्रबंधक, जम्मू