बच्ची को रास्ते पर ही क्यों फेंका, उसे दबाया या जलाया भी जा सकता था। बच्ची के घर के पास शव फेंकने का कोई तुक नहीं बनती है। इसके अतिरिक्त जब बच्ची का चौथा था तो समुदाय विशेष के लोगों ने गांव में रैली निकाली और घर पर आकर उन्हें इस बात की धमकी दी वह उन्हें देख लेंगे।
पहले दिन से ही समुदाय विशेष के लोगों ने इसे जाति के साथ जोड़ा और इसे सांप्रदायिक रंग दिया, इसलिए ही हिंदू एकता मंच बनाने की जरूरत पड़ी। राज खजूरिया ने कहा कि इस मामले में सीएम ने उनसे कभी बात नहीं की। 23 जनवरी के आसपास वह उनसे मिलने गए, लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें समय ही नहीं दिया।
भाजपा के सभी विधायकों से भी बात की गई, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। सिर्फ सीबीआई जांच की ही मांग की है। कभी इसे धर्म विशेष के साथ नहीं जोड़ा गया, लेकिन मृतक पक्ष के लोगों ने अपने विरोध और इंसाफ की मांग को धर्म-जाति के साथ जोड़कर इसे सांप्रदायिक रंग दिया।
बाहर से आए लोगों ने यहां का माहौल खराब किया और इसलिए ही मंच बनाना पड़ा। भय के कारण मृतक पक्ष के लोगों को पलायन करना पड़ा, यह बात गलत है। अभी भी बाकी के कुनबे वहीं रह रहे हैं।
तीन गांवों का साझा है देव स्थान
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार देव स्थान किसी का व्यक्तिगत नहीं है। तीन गांव, जिसमें कूटा, रसाना और धमियाल शामिल हैं, उन सभी गांवों के लोगों का यह साझा देव स्थान है। हर रविवार को देव स्थान में भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें तीनों गांवों के लोग शामिल होते हैं।
देव स्थान की चाबी तीनों गांवों के जिम्मेदार व्यक्तियों के पास है। देव स्थान के कुल तीन दरवाजे हैं और देव स्थान को आने के लिए दो रास्ते हैं। एक रास्ता कच्चा है, जबकि दूसरा पक्का है। देव स्थान दो ओर से घने जंगल और खाई से घिरा हुआ है।
बच्ची का घर जहां अब ताला लटका हुआ है
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लोगों से मिली जानकारी के अनुसार रसाना में मारी गई आठ साल की बच्ची के घर में ताला लगा हुआ है और घर वाले घटना के कुछ दिन बाद से ही घर को छोड़कर चले गए हैं। इस समय घर के आसपास दूसरा कोई घर नहीं है। गांव में बक्करवाल समुदाय के करीब दस कुनबे हैं।
बच्ची के घर से कुछ दूरी पर तीन कुनबे अभी भी वहीं रहते हैं। बाकी के कुनबे कुल्ले में रहते हैं। इस समुदाय का अकेला यही पक्का घर है। तीन कुनबों को छोड़ कर बाकी के कुनबे काफी दूरी पर हैं।
नाबालिग को सुधारने के लिए मामा को सौंपा गया था
सांझी राम की बेटी मोनिका ने बताया कि सांझी राम राजस्व विभाग में बतौर जिलादार काम करते थे। नवंबर 2017 में वह इस पद से ही रिटायर हुए थे। इसके बाद ही उसने नाबालिग को अपने पास रख लिया, क्योंकि उसकी दोनों बेटियों मोनिका और मुधबाला की शादी हो चुकी है।
दो बेटे हैं, लवलीतोश शर्मा नेवी में है और विशाल शर्मा मेरठ में पढ़ता है। विशाल को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। नाबालिग को उसके मामा सांझीराम नवंबर 2017 में ही
अपने पास ले आया था। उसके माता पिता ने भी मामा को यह कहकर सौंपा था कि इसे सुधारना।
चूंकि उसे हायर सेकेंडरी स्कूल से इस बात के लिए निकाल दिया गया था कि वह अक्सर स्कूल में बच्चों के साथ हाथापाई करता था और लड़कियों के साथ भी अभद्र व्यवहार करता था।