दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड के पंजाथ नाग गांव के लोगों ने पूर्वजों की सदियों पुरानी परंपरा को आज भी कायम रखा है। यहां धान की रोपाई से पहले झरनों की सफाई के साथ-साथ मछली पकड़ने की प्रतियोगिता करवाई जाती है। यह एक स्थानीय त्यौहार के रूप में उभरा है, जो अब दूसरे गांवों के लोगों को भी आकर्षित करता है। ग्रामीण हर साल मछली पकड़ने की प्रतियोगिता में पंजाथ में पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पंजाथ 500 झरनों का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें पीर पंजाल की तलहटी पर स्थित झरने भी शामिल हैं। पंजाथ झरना काजीगुंड के सैकड़ों परिवारों के लिए सिंचाई और पीने के पानी का एक मुख्य स्रोत है। हर साल धान की खेती शुरू होने से पहले स्थानीय निवासी उचित सिंचाई व्यवस्था के लिए गाद और खरपतवार हटाकर जलाशय को साफ करते हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा, मैं बचपन से इस वार्षिक उत्सव में भाग लेता आ रहा हूं। पंजाथ नाग उनके घर से एक किलोमीटर दूर है। इस उत्सव को देखने 50 किलोमीटर दूर से भी लोग आते हैं।
सरकार की नरज-ए इनायत का इंतजार
स्थानीय निवासी बहरूज बशीर ने कहा कि हर साल मई के तीसरे या चौथे सप्ताह में ग्रामीण एक दिन चुनते हैं जब सेब, बादाम और अखरोट के बाग फूलों से भरे होते हैं। 500 मीटर के क्षेत्र में फैले पंजाथ नाग की सफाई करते हैं और मछली पकड़ते हैं। यह एक ऐसी परंपरा है जो उन्हें पूर्वजों से विरासत में मिली है।
उन्होंने कहा, हम पूरे साल इस उत्सव का बेसब्री से इंतजार करते हैं। लोग इस दिन पकड़ी गई मछलियों को घर ले जाते हैं और उस दिन दोस्तों और परिवार के लिए दावत मनाते हैं। इस उत्सव पर सरकार को भी उचित ध्यान देने की जरूरत है और अगर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा, तो यह यहां कई लोगों के लिए रोजगार पैदा कर सकता है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से झरने का रखरखाव करने और इसे विलुप्त होने से बचाने की गुहार लगाई है।