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महामारी के दौरान कर्मचारी को दंडित करना मानवीय प्रशासन का उल्लंघन : हाईकोर्ट

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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने कहा है कि महामारी के दौरान अवकाश विधिवत स्वीकृत होने के बाद भी कर्मचारी को अनुपस्थिति के लिए दंडित करना न केवल कानूनी रूप से असमर्थनीय है, बल्कि यह समता और मानवीय प्रशासन के सिद्धांतों का भी उल्लंघन करता है।
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न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की पीठ ने कहा, यह न्यायालय इस तथ्य का न्यायिक संज्ञान लेता है कि कोविड-19 महामारी एक असाधारण सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल थी, जिसमें सभी क्षेत्रों के कर्मचारी शारीरिक और मानसिक रूप से प्रभावित हुए थे।
यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय में एक वरिष्ठ सहायक द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें उन्होंने 24 नवंबर 2022 के एक आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें हेड असिस्टेंट के पद पर पदोन्नति से वंचित कर दिया गया।
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अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता बसीर-उल-हक हुस्सामी को अप्रकाशित प्रतिकूल वार्षिक गोपनीय रिपोर्टों के आधार पर पदोन्नति से वंचित करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है।
अदालत ने कहा, मामले की समता को तौलते हुए, हम इस बात से सहमत हैं कि याचिकाकर्ता को प्रशासनिक चूक के कारण, जो पूरी तरह से उनके नियंत्रण से बाहर थी, पर्याप्त नुकसान हुआ है। अदालत ने कहा कि मांगी गई राहत प्रदान करना न केवल याचिकाकर्ता के व्यक्तिगत अधिकारों को सही ठहराएगा, बल्कि सार्वजनिक सेवा में निष्पक्षता, समानता और जवाबदेही के संवैधानिक मूल्यों को भी पुष्ट करेगा।
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