गणेश लक्ष्मी की मूर्ति खरीदते समय रखें इन बातों ध्यान
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डुग्गर प्रदेश में पुग्गा व्रत लोकप्रिय व्रर्तों में विशेष रूप से मानाया जाता है। माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, आदर्शजीवन के साथ-साथ, ग्रहों की शांन्ति के लिए इस व्रत का संकल्प लेती हैं। इस दिन माताएं निर्जला व्रत रखकर चंद्र को अर्घ्य देकर जल ग्रहण करती हैं। हिंदू पंचाग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को इस व्रत का विधान किया जाता है।
प्रदेश में पुग्गा व्रत विशेष रूप से मनाने की अपनी परम्परा है। इस दिन तिलों को कूट कर गुड़ मिलाकर लड्डू बनाए जाते हैं, कुछ लोग स्यूल-तिल-गुड़ मिलाकर भी लड्डू बनाते हैं। व्रत करने वाली माताएं तिलों से बनाये लड्डू का श्री गणेश जी को भोग लगाते समय अढाई मूली, अढाई गन्ने की दिलयां तिल आदि को लेकर संकल्प करती हैं।
पद्य श्री प्रो. विश्वमूर्ति शास्त्री ने प्रदेश में पुग्गा व्रत मनाने की महत्ता बताते हुए, व्रत मनाने का विधान बताया। उन्होंने कहा कि ऊं श्री गणेशाय नम: इस मंत्र का जप अथवा जिन माताओं को नारद-पुराणोक्त गणेश स्तोत्र आता है, वे 12 पाठ करके गणेश जी को भोग लगाएं। इसके साथ दक्षिणादि से गणेश जी को प्रसन्न कर संतान की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करके चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके उपरांत कूटे हुए तिलों में गुड़ मिलाकर तथा अन्य फलाहार आदि का प्रसाद ग्रहण करें। चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 49 मिनट पर है।