जम्मू-कश्मीर सरकार के गृह विभाग ने बुधवार को अलगाववाद का प्रचार करने वाली 25 पुस्तकों के प्रकाशन पर प्रतिबंध लगा दिया। साथ ही इनकी प्रतियों और अन्य दस्तावेज को जब्त करने का आदेश जारी किया है।
आदेश में कहा गया है कि सरकार के संज्ञान में आया है कि कुछ साहित्य जम्मू और कश्मीर में मिथ्या आख्यान और अलगाववाद का प्रचार करते हैं। जांच और विश्वसनीय खुफिया जानकारी पर आधारित उपलब्ध साक्ष्य स्पष्ट रूप से संकेत देते हैं कि हिंसा और आतंकवाद में युवाओं की भागीदारी के पीछे एक महत्वपूर्ण कारक अलगाववादी साहित्य का व्यवस्थित प्रसार रहा है।
यह अक्सर ऐतिहासिक या राजनीतिक टिप्पणियों के रूप में आंतरिक रूप से प्रसारित होता है और युवाओं को गुमराह करने, आतंकवाद का महिमा मंडन करने और भारतीय राज्य के विरुद्ध हिंसा भड़काने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह साहित्य शिकायत, पीड़ित होने और आतंकवादी वीरता की संस्कृति को बढ़ावा देकर युवाओं के मानस पर गहरा प्रभाव डालेगा।
इसके अलावा जम्मू और कश्मीर में युवाओं के कट्टरपंथीकरण में योगदान देने वाले कुछ तरीकों में ऐतिहासिक तथ्यों को विकृत करना, सुरक्षा बलों का अपमान करना, धार्मिक कट्टरपंथ, अलगाव को बढ़ावा देना आदि शामिल हैं।
उपरोक्त संदर्भ में 25 ऐसी पुस्तकों की पहचान की गई है, जो जम्मू-कश्मीर में मिथ्या आख्यान और अलगाववाद का प्रचार करती हैं और उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 98 के अनुसार ज़ब्त घोषित किया जाना आवश्यक है। पहचानी गई 25 पुस्तकें अलगाववाद को भड़काने वाली और भारत की संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डालने वाली पाई गई हैं, इसलिए, भारतीय न्याय संहिता 2023 के प्रावधान इन पर लागू होते हैं।
भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, जम्मू-कश्मीर सरकार इस अधिसूचना के अनुलग्नक ए के अंतर्गत 25 पुस्तकों के प्रकाशन और उनकी प्रतियों या अन्य दस्तावेजों को सरकार के पास ज़ब्त करने की घोषणा करती है।