'मेहराज मलिक पर पीएसए कठोर और अनुचित है, पुनर्विचार किया जाना चाहिए', डॉ फारूक अब्दुल्ला
जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां)) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने डोडा जिले की समग्र स्थिति और विधायक मेहराज मलिक पर जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत मामला दर्ज करने के सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की है।
डॉ. अब्दुल्ला ने स्वीकार किया कि डोडा के उपायुक्त के प्रति मलिक का आचरण अनुचित था, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासन द्वारा की गई दंडात्मक कार्रवाई अनुचित थी। डॉ अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने (मेहराज मलिक) जो गलती की है, जिसमें उन्होंने डीसी के सामने गुस्ताखी की है।
मैं उसको अफसोस समझता हूं और यह भी गलत समझता हूं कि जो उस पर पीएसए लगाया गया है यह गलत है। अगर वो उसी वक्त माफी मांग लेता तो यह हालत नहीं होती।डॉ फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि आज डोडा मुसीबत में पड़ा हुआ है।
एक तरफ से फ्लड की मुसीबत है, दूसरी तरफ इसकी (मलिक) मुसीबत है। उन्होंने कहा कि मैं हुकूमत से यही कहूंगा कि इस पर विचार किया जाए, पीएसए हटाया जाए और यह (मलिक) भी जो डीसी के लिए जो शब्द इस्तेमाल किये हैं, वो वापस लें। बता दें कि इस घटना के बाद डोडा में तनाव बढ़ गया है और प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं।
डोडा में तनाव के बीच जामिया मस्जिद के पास घर में विस्फोट
शांतिपूर्ण तनाव के बीच जम्मू-कश्मीर के डोडा में वीरवार को हुए एक विस्फोट ने हालात और अधिक संवेदनशील बना दिए। यह विस्फोट शहर में जामिया मस्जिद के पास एक घर में हुआ। आशंका है कि घर में बम बनाने के दौरान यह धमाका हुआ। पुलिस ने घर से दो सगे भाइयों समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया है। ये विस्फोट के दौरान मौके पर मौजूद थे। विस्फोट में कोई हताहत नहीं हुआ है।
आम आदमी पार्टी के विधायक मेहराज मलिक को पीएसए के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के विरोध में हिंसक प्रदर्शन के चलते डोडा जिले में पहले से ही तनाव है। निषेधाज्ञा लागू होने के साथ ही अतिरिक्त सुरक्षाबल भी तैनात है।
विरोध प्रदर्शनों और पुलिस से झड़प के दौरान 80 से अधिक हिरासत में लिए जा चुके हैं। इस बीच शहर में धमाका होने के तुरंत बाद पुलिस और सुरक्षाबल के जवानों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया।पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस मामले में जावेद अहमद अत्तू और मुजफ्फर अहमद अत्तू समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है।
इनसे पूछताछ जारी है। जावेद और मुजफ्फर सगे भाई हैं। विस्फोट की सटीक प्रकृति और कारण का पता लगाया जा रहा है। पुलिस को आशंका है कि बम बनाने के दौरान यह हादसा हुआ है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि विस्फोट में कच्चे विस्फोटकों का इस्तेमाल किया गया है जिसकी जांच एफएसएल टीम और पुलिस कर रही है।
डोडा-किश्तवाड़-रामबन के आईजी ने अपने एक्स हैंडल पर घटना की पुष्टि करते हुए लिखा कि डोडा शहर के ठुकार मोहल्ले से कम तीव्रता का विस्फोट हुआ। इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
जिले में तीसरे दिन भी धारा 163 लागू
स्कूल 14 तक बंदडोडा जिले में वीरवार को लगातार तीसरे दिन भी निषेधाज्ञा लागू रही। एहतियात के तौर पर मोबाइल इंटरनेट और वाई फाई सेवाएं बंद रहीं। प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) अधिनियम की धारा 163 लागू कर दी है जिसके तहत बिना पूर्व अनुमति के लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। स्कूलों को 14 सितंबर तक बंद कर दिया गया है।
कानूनी प्रक्रिया में डोडा विधायक की मदद के लिए तैयार: उमर अब्दुल्ला
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वीरवार को कहा कि उनकी सरकार और पार्टी डोडा विधायक मेहराज मलिक को जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत में लिए जाने के बाद चल रही कानूनी लड़ाई में उनका समर्थन करने के लिए तैयार है।
गुपकार रोड स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए उमर ने कहा कि विधायक के परिवार और सहयोगियों को सहायता प्रदान की जाएगी और प्रभावी बचाव के लिए पीएसए के ढांचे से परिचित वकील की नियुक्ति बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने मलिक के पिता से मुलाकात कर उन्हें पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया है।
उमर ने आगे कहा कि पार्टी विधायक के सहयोगियों को सर्वोत्तम दृष्टिकोण के बारे में मार्गदर्शन देगी। उन्होंने सलाह दी, आम आदमी पार्टी और उनके सहयोगियों को बाहर से वकील न लाकर यहां से एक ऐसे वकील को नियुक्त करना चाहिए जो पीएसए के कानून को जानता हो। जरूरत पड़ने पर हम हर संभव मदद के लिए तैयार हैं।
अपने अनुभव का हवाला देते हुए अब्दुल्ला ने कहा 2020 में जब मेरे खिलाफ पीएसए का मामला दर्ज किया गया था, तो मैंने यहीं से एक अच्छे वकील को नियुक्त करके सुप्रीम कोर्ट में वह लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पीएसए कानून देश में कहीं और लागू नहीं होता, इसलिए स्थानीय वकील की नियुक्ति ही फायदेमंद होगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से इस बात पर विचार करने का आग्रह किया कि जनता इस तरह की कार्रवाइयों को कैसे देखती है। उन्होंने कहा, "यह सही नहीं है। इससे लोगों में गलत संदेश जाता है। एक मौजूदा विधायक के खिलाफ पीएसए का इस्तेमाल करना अनुचित है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों को विधानसभा सचिवालय या अध्यक्ष के पास उठाया जाना चाहिए।
अब्दुल्ला ने इस बात को खारिज कर दिया कि राज्यसभा सांसद संजय सिंह की नजरबंदी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया, "13 जुलाई को हमें बंद करके रखा गया था, यह हकीकत है। सिंह अभी भी हिरासत में हैं। उन्होंने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति को सामान्य बताने के दावों के बावजूद, सख्ती की नीति जारी है।
उमर ने कहा विधायक के खिलाफ पीएसए का इस्तेमाल गलत है और एक राज्यसभा सदस्य को अवैध रूप से हिरासत में लेकर गलती को और बढ़ा दिया गया है। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।