डोडा विधायक मेहराज मलिक बिना सुनवाई के छह महीने कैद में रह सकते हैं। जनसुरक्षा अधिनियम में छह माह से दो साल तक की कैद का प्रावधान है। मेहराज मलिक पर जिले में आंतरिक सुरक्षा के तहत पीएसए दर्ज हुआ है।
जम्मू के डोडा के विधायक मेहराज मलिक पर लगे आरोपों के तहत उन्हें कम से कम छह महीने तक बिना सुनवाई के कैद में रखा जा सकता है। विधायक को जनसुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत गिरफ्तार किया गया है। जम्मू-कश्मीर के तहत इस अधिनियम में दो धाराएं तय हैं।
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इनमें पहली धारा में सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा होना शामिल है। जबकि दूसरी धारा में राज्य की सुरक्षा को खतरे की बात शामिल है। पहली धारा के तहत किसी को गिरफ्तार किया जाता है तो उसे कम से कम छह महीने तक बिना मुकदमे के जेल में रखा जा सकता है। प्रदेश की सुरक्षा को खतरा होने की सूरत में दो साल तक सजा कैद में रखने की व्यवस्था की गई है।
डोडा विधायक मेहराज मलिक पर उपायुक्त हरविंद्र सिंह के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में जिले की शांति, लोक व्यवस्था और सौहार्द को खतरा होने की बात कही गई है। यानि इस धारा के तहत मामला जिलास्तर पर केंद्रित हो गया है और इस प्रावधान में मेहराज मलिक पर लगे आरोप वापस नहीं लिए गए तो विधायक को छह महीने जेल में काटने होंगे।
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विधायक के पीएसए के तहत नामजद होने से समूचे प्रदेश में मामला तूल पकड़ गया है। सियासतदानों से आम तबके तक सभी इस मामले को लेकर दो धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं।
डोडा के विधायक का आरोपों से पुराना नाता
डोडा के विधायक मेहराज मलिक का आरोपों से पुराना नाता रहा है। विधायक पर अब तक 16 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इन एफआईआर में कई संगीन आरोप भी शामिल हैं। पूर्व मंत्री की एफआईआर पर गैर जमानती वारंट जारी हो चुके हैं। उन पर जम्मू में पत्रकार को अगवा करने का भी आरोप लगा है। इससे पहले वे शिक्षा मंत्री पर टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद को गद्दार कहा था। इन सभी आरोपों में से किसी में भी मेहराज मलिक को अभी सजा नहीं हुई है।
उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती झेल चुके हैं पीएसए
जम्मू-कश्मीर में जनसुरक्षा अधिनियम के तहत दर्ज यह कोई पहला मामला नहीं है। बल्कि यहां दो पूर्व मुख्यमंत्री समेत कई राजनीतिक प्रतिनिधियों पर इस अधिनियम के तहत मामले दर्ज हो चुके हैं। 2020 में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती पर जनसुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन्हें उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया गया था।
इसके अलावा नेशनल कॅन्फ्रेंस के दो अन्य बड़े नेताओं के खिलाफ भी पीएसए में उस समय केस दर्ज किया गया। पूर्व आईएएस और राजनेता शाह फैसल पर जनसुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। इन सभी को आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा माना गया था और सभी के खिलाफ छह माह की अवधि के लिए पीएसए लगाया गया था।
सरकार करेगी मेहराज मलिक की मदद : मुख्यमंत्री
विधायक मेहराज मलिक के मामले के तूल पकड़ते ही मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उनके घर का दौरा किया है। मुख्यमंत्री ने यहां मेहराज मलिक के पिता से मुलाकात की और उन्हें सरकार के कदम उठाने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायक पर लगे पीएसए को हटाने के लिए सरकार प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रदेश स्तर पर हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
पीएसए लोकतंत्र के लिए खतरा : उपमुख्यमंत्री
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि पीएसए लोकतंत्र के लिए खतरा है। एक साधारण प्राथमिकी दर्ज की जा सकती थी। पीएसए उन पर लगता है जो समाज के लिए खतरा हो। डोडा के लोगों ने उन्हें निर्वाचित किया है। आज दिन उधर है तो कल इधर भी आएगा। जो भी भाईचारे को तोड़ने की बात करेगा, उस पर कार्रवाई हो रही है। अभी भी मौका है पुलिस विभाग को सोचना चाहिए कि सामांतर एफआईआर दर्ज की जाए और विधायक पर लगे पीएसए को हटाया जाए।