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Jammu News: रात में कार्रवाई, दिनभर बाजार बंद, शाम को खुलीं दुकानें

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- मोती बाजार में चार दुकानों को सील करने के बाद कारोबारियों का विरोध, चैंबर की पहल पर नगर आयुक्त ने डी-सील करने के दिए निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। मोती बाजार में सोमवार देर रात करीब दो बजे नगर निगम ने चार दुकानों को सील कर दिया। इससे मंगलवार को कारोबारियों में रोष पनप गया। कार्रवाई के विरोध में बाजार सुबह से शाम करीब चार बजे तक बंद रहा।
दिनभर चली बातचीत के बाद चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री जम्मू और विधायक की पहल पर नगर निगम आयुक्त ने संबंधित दुकानों को खोलने के निर्देश दिए। इसके बाद लिखित आश्वासन पर दुकानें खोल दी गईं।
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कार्रवाई के बाद मोती बाजार के दुकानदार चैंबर अध्यक्ष अरुण गुप्ता के पास पहुंचे। अरुण गुप्ता ने वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजीव गुप्ता, कोषाध्यक्ष राजेश गुप्ता और संबंधित कारोबारियों के साथ नगर आयुक्त से मुलाकात की। अरुण गुप्ता ने कहा कि दुकानों को सील करने से न कारोबारियों को फायदा है और न ही निगम को।
उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में लोग श्राद्ध के लिए जरूरी सामान खरीदने बाजार पहुंच रहे हैं। ऐसे में दुकानें बंद रहने से कारोबारियों के साथ ग्राहकों को भी परेशानी हुई।

निगम ने नोटिस के बाद अतिक्रमण नहीं हटाने की बात कही
कारोबारियों ने पूछा- फुटपाथों पर कब्जे पर कार्रवाई कब करेंगे
नगर निगम की ओर से स्पष्ट किया गया कि संबंधित दुकानदारों को 25 सितंबर को नोटिस जारी कर 10 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया था। तय समय में अतिक्रमण नहीं हटाने और जवाब नहीं देने पर कार्रवाई की गई। दुकानदारों से फुटपाथ पर सामान नहीं रखने और पैदल आवाजाही बाधित नहीं करने की अपील की गई है। कारोबारियों ने सवाल उठाया कि यदि फुटपाथ खाली रखना जरूरी है तो शहर के अन्य बाजारों में फैले अतिक्रमण पर भी इसी तरह कार्रवाई कब होगी।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़
में सीलिंग नहीं कर सकता निगम
मोती बाजार में चार दुकानों को सील करने के बाद मूवमेंट कल्कि के लीगल हेड एडवोकेट सुमेश्वर कोहली और सैनिक कालोनी व्यापार मंडल अध्यक्ष राकेश चौधरी ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। दोनों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को हर व्यावसायिक प्रतिष्ठान को सील करने के लिए सामान्य आधार नहीं बनाया जा सकता। प्रत्येक कार्रवाई के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान, कथित उल्लंघन और निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है। उन्होंने निगम से मांग की कि संबंधित इलाकों की जोनिंग, मास्टर प्लान, जारी नोटिस, सुनवाई और सीलिंग का कानूनी आधार सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने प्रभावित कारोबारियों को प्रभावी सुनवाई का अवसर देने की मांग भी की।
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