- हल्का बल प्रयोग कर रोके गए, सरकार पर बिफरे कर्मी
- बोले - सरकार हमारे साथ समिति-समिति का खेल न खेले
हड़ताल के पहले दिन जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ा आंशिक असर
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। नियमितीकरण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने जा रहे जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों की पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई। बैरिकेड और कंटीले तारों को पार कर कर्मचारी आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने लाठियां फटकारीं औरर हल्का बल प्रयोग किया। दैनिक वेतनभोगियों ने कठुआ, रियासी और राजोरी में भी प्रदर्शन किया। वहीं, हड़ताल का असर पानी की आपूर्ति पर पड़ा है। हालांकि जम्मू संभाग के दस जिलों के शहरी इलाकों में आंशिक असर रहा, तो ग्रामीण इलाकों में ज्यादा प्रभाव दिखा।
नियमितीकरण की मांग को लेकर जलशक्ति विभाग के 32 हजार अस्थायी कर्मचारियों ने वीरवार रात 8 बजे से 72 घंटों की हड़ताल शुरू कर दी। जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित न हो इसलिए 15 हजार नियमित कर्मचारियों के साथ ही आठ हजार अन्य विभागों के कर्मचारी मैदान में उतार दिए गए। हालांकि इसके बाद भी आपूर्ति व्यवस्था पर प्रभाव पड़ा है।
जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारी सुबह करीब 11 बजे जम्मू के बीसी रोड स्थित मुख्य अभियंता के पुराने कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए और प्रदर्शन शुरू किया। कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने कहा कि चुनाव पूर्व नेकां सरकार ने नियमितीकरण और बकाया वेतन जारी करने का वादा किया था, लेकिन पूरा नहीं किया। हड़ताल की अगुवाई कर रहे कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार की बनाई समिति पर उन्हें भरोसा नहीं है। सरकार मुद्दे का समाधान करने के बजाय उनके साथ तीन दशक से समिति-समिति का खेल खेल रही है। 32 हजार दैनिक वेतनभोगी तीन दशक से विभाग में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन सरकार हर बार आश्वासन ही देती है। इसके बाद दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आवास का घेराव करने निकल पड़े।
पुलिस ने सीएम आवास की तरफ जाने वाले रास्ते पर कर रखी थी किलेबंदी
सीएम आवास का घेराव किए जाने की जानकारी पर पुलिस ने आवास की तरफ जाने वाले रास्ते पर किलेबंदी कर दी थी। इंद्रा चौक पर बैरिकेडिंग के साथ ही कंटीले तार लगाए गए थे। यहां पहुंचते ही पुलिस व कर्मचारियों के बीच काफी देर तक नोकझोंक होती रही। पुलिस ने कर्मचारियों को आगे जाने की अनुमति नहीं दी।
बैरिकेडिंग फांदकर आगे बढ़े कर्मचारी
गुस्साए कर्मचारी बैरिकेडिंग फांदकर रघुनाथ बाजार की ओर बढ़ने लगे। यहां पर पहले पुलिस और कर्मियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई, बाद में पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया। हालांकि इसमें किसी भी कर्मी को चोट नहीं आई।
चाहे बैरिकेडिंग करें या रास्ते पर गर्म कोयला बिछाएं...हक के लिए लड़ेंगे
कर्मचारी नेताओं ने किलेबंदी पर भी नाराजगी जताई। कहा, सरकार चाहे बैरिकेडिंग करे या फिर रास्ते पर गर्म कोयला बिछाए, हम हक के लिए लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे। सरकार को समिति बनाने से ज्यादा आगे का काम करना होगा। हर बार समिति बनाकर कर्मियों को ठगा नहीं जा सकता। रेजिडेंसी रोड पर पुलिस ने कर्मियों को रोका, जिसके बाद उन्होंने रघुनाथ बाजार चौक में बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। कर्मियों ने सरकार से उन्हें नियमित करने के लिए नीति बनाने की मांग की। इसके बाद जलशक्ति विभाग के मुख्य अभियंता से कर्मचारियों ने मुलाकात कर उन्हें मांगपत्र सौंपा।
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की खरी-खरी
2014 में उमर ने बनाई थी समिति...दस साल बीते कोई समाधान नहीं
गुस्साए अस्थायी कर्मियों ने कहा कि मुख्यमंत्री गहरी नींद में सोए हैं, हम उन्हें जगाने जा रहे हैं। 2014 में मुख्यमंत्री रहते हुए भी उमर अब्दुल्ला ने समिति बनाई थी, लेकिन दस साल बीत जाने के बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ।
- केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में अस्थायी कर्मियों के लिए न्यूनतम मजदूरी अधिनियम लागू किया गया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के कर्मियों को इसका लाभ नहीं दिया गया।
आगे भी बढ़ा सकते हैं हड़ताल
72 घंटे की हड़ताल को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। सरकार जितना जोर कर्मियों को रोकने में लगा रही है, उतना नियमितीकरण करने पर लगता तो आज तक नीति जारी हो गई होती। सीएम आवास के घेराव के दौरान पुलिस ने हल्का बलप्रयोग किया है। हम सरकार को चेतावनी दे रहे हैं कि हमारी मांगों को पूरा नहीं किया तो प्रदर्शन तेज कर देंगे।
- रवि हंस, पदाधिकारी, पीएचई इंप्लाइज यूनाइटेड फ्रंट