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मेटाडोर चलीं न ऑटो, निजी बसों के भी थमे रहे पहिये

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महेश पुरा चौक के पास मेटाडोर स्टैंड में नारेबाजी करते मेटाडोर के चालक और परिचालक। - फोटो : SHRINAGAR
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जम्मू। ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का जम्मू शहर और आसपास इलाकों में भी काफी असर देखने को मिला। 100 से अधिक रूट पर मेटाडोर नहीं चलीं, जिससे तीन हजार बसों (मेटाडोर) के पहिये थमे रहे। निजी बसों के साथ ऑटो भी नहीं चले। लोगों को पैदल अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। बाहरी राज्यों से आए यात्री सिर पर सामान रखकर रोड पर पैदल चलते नजर आए। हालांकि शहर में जेकेआरटीसी की बसें चलीं, लेकिन इनकी कमी के कारण लोगों को कई-कई घंटे बस स्टॉप पर इंतजार करना पड़ा।
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जम्मू में मेटाडोर शहर की लाइफलाइन मानी जाती है। शहर में मेटाडोर ही एकमात्र सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था है, जिसमें प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग सफर करते हैं। शहर के आसपास इलाकों के बुधवार को मेटाडोर नहीं चलने से रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामाना करना पड़ा। कई लोग लिफ्ट मांगकर ट्रेन और फ्लाइट लेने पहुंचे। सुबह नौकरी पेशा वालों को भी काफी परेशानी हुई। मेटाडोर नहीं चलने से कई लोग काम पर नहीं जा पाए तो कुछ लिफ्ट लेकर पहुंचे। आम दिनों में दिनभर शहर के जिन चौक-चौराहों पर मेटाडोर का जमावड़ा रहता था, वे सुनसान दिखे।
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मिनी बस यूनियन ने किया प्रदर्शन
मिनी बस यूनियन ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदेशव्यापी हड़ताल का समर्थन करते हुए यूनियन के सदस्यों ने कहा कि सरकार ट्रांसपोर्टरों के हितों की अनदेखी कर रही है। प्रधान विजय सिंह चिब ने कहा कि कोरोना काल में केंद्र सरकार ने वाहनों के तमाम जरूरी दस्तावेजों की वैधता को 31 मार्च तक बढ़ाया है, लेकिन आरटीओ जम्मू में हमसे दस्तावेजों की वैधता समय पर पूरा नहीं करने पर जुर्माना लगा रहा है।
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शहर में जेकेआरटीसी के पास मात्र 25 वाहन
जम्मू शहर में जेकेआरटीसी के पास बसों की कमी है। 20 इलेक्ट्रिक बसों के अलावा शहर में जेकेआरटीसी के तीन चार अन्य मिनी बसें हैं, जबकि शहर में निजी ट्रांसपोर्टरों की तीन हजार से अधिक मेटाडोर चलती हैं। जब ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल रहती है तो शहर में लोगों को बड़ी परेशानी उठानी पड़ती है। जेकेेआरटीसी के पास बसों की कमी होने से शहर के कई रूट पर एक भी बस नहीं चलती है। हालांकि बुधवार को निजी ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का फायदा जेकेआरटीसी को मिला और उसे राजस्व में बढ़ोतरी हुई।
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