निकायों की हद में प्रॉपर्टी टैक्स वसूले जाने को लेकर अधिसूचना जारी होने के बाद जहां निकाय प्रधानों में असमंजस की स्थिति है, वहीं जम्मू संभाग के कठुआ में आम लोग भी इस टैक्स के हक में नहीं हैं। अधिक लोगों का कहना है कि शहरों या कसबों में अभी इतना विकास नहीं हुआ है कि लोगों पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाए। न तो अधिकतर निकायों में कचरा उठाने के प्रबंध हैं और न ही विकास की उचित रणनीति। बावजूद इसके लोगों की जेबों को ढीला करने की कोशिश की जा रही है, जो सही नहीं है।
केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों को उम्मीद थी कि सरकार से उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन इसके बजाय अगर उन्हें एक और कर के बोझ तले दबाया जा रहा है, तो यह पूरी तरह से गलत है। -सुरेंद्र गुप्ता, वार्ड-एक
पहले ही लोग अलग-अलग तरह के टैक्स चुका रहे हैं। हाल के दिनों में कठुआ के लोगों पर टोल टैक्स का दबाव पहले ही शुरू हो चुका है। अब संपत्ति पर लगने वाला कर लोगों के लिए उचित नहीं है। - हिमांशु शर्मा, एडवोकेट, वार्ड 15, कठुआ
कोरोना संकट के चलते लोगों का रोजगार पहले ही प्रभावित हुआ है। महंगाई भी बढ़ी हुई है। कठुआ इतना बड़ा शहर नहीं है। शहर का चालीस फीसदी हिस्सा अभी विकसित भी नहीं है। ऐसे में विकास करवाने के बाद यह शहर माना जाए और फिर प्रॉपर्टी टैक्स लगाया जाए। - दया करनी, वार्ड 19, कठुआ