विभागीय सूत्रों के अनुसार अगर दस-दस करोड़ के प्रस्ताव बनते तो आयुक्त अपने स्तर पर प्रोजेक्ट को पास कर सकती थी। मगर ऐसा नहीं हो पाया। इस बारे में जानकारी न तो मेयर को थी न ही आयुक्त को। ऐसे में शहर का बड़ा प्रोजेक्ट हाथ से निकल गया।
हाउस में ही मसले को रखा गया। आखिर ऐसे ही प्रोजेक्ट कैंसिल होते रहे तो शहर में विकास कैसे होगा। इसमें सीधी मेयर की लापरवाही सामने आई है। -राजेंद्र शर्मा, चेयरमैन हाउस कमेटी, जम्मू नगर निगम
प्रोजेक्ट कैंसिल होने का कारण जमीन का विवाद भी रहा है। जहां पर जमीन फाइनल की, वहां लोगाें ने विरोध जताया। ऐसे में जगह का चयन नहीं हो पाया। हालांकि प्रोजेक्ट के काम के लिए नगर निगम ने पूरा प्रयास किया। - सुधीर बाली, एसीआर (संयुक्त आयुक्त), जेएमसी