जम्मू/लेह। तीस से चालीस फुट बर्फ और बर्फीले तूफान के खतरे के चलते छह माह तक बंद रहने वाले जोजिला दर्रे को अस्सी किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पार किया जा सकेगा। एशिया की सबसे लंबी दोतरफा सुरंग जोजिला को हर मौसम में सुरक्षित आवाजाही का जरिया बनाने के लिए यूरोप की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। मौजूदा समय में साढ़े तीन घंटे का समय लेने वाला दर्रा सुरंग बनने से बाईपास हो जाएगा। सोनामर्ग से बालटाल के इलाके में बर्फीले तूफान का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। ऐसे 52 स्थानों की पहचान कर बर्फीले तूफान से निपटने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। बर्फ की चुनौती देखते हुए इस इलाके में पांच पुल, छह कैच डैम, 13 रिफ्लेक्टर डैम, आठ कट और दो स्नो गैलरी बनाई जाएंगी। फर्स्ट ब्लास्ट समारोह में उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि उन्होंने खुद भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। लिहाजा वह कह सकते हैं कि जोजिला सुरंग देश-दुनिया के लिए मिसाल होगी।
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जम्मू-कश्मीर, लद्दाख
बनाएंगे संयुक्त समिति
जम्मू/लेह। जोजिला सुरंग को छह साल में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इतनी लंबी अवधि के दौरान निर्माण और जोजिला दर्रे की वर्तमान सड़क के प्रबंधन के लिए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख एक संयुक्त समिति बनाएंगे। यह सुझाव लद्दाख के उप राज्यपाल आरके माथुर की तरफ से आया। माथुर ने कहा कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग समेत अन्य विभागों और हितधारक प्रदेशाें की संयुक्त समिति बनाकर तमाम अड़चनों और चुनौतियों से निपटा जा सकता है। माथुर ने कहा कि वर्तमान में जोजिला दर्रे से सड़क संपर्क को खोलने और बंद करने का काम कश्मीर मंडलायुक्त और गांदरबल जिला प्रशासन देखते हैं। इसके लिए संयुक्त प्रबंधन तंत्र बनने से और आसानी हो जाएगी। इस पर जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि लद्दाख के एलजी की ओर से आए सुझाव पर निश्चित रूप से संयुक्त प्रबंधन तंत्र बनाने की व्यवस्था की जाएगी।
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सीईसी कारगिल बोले - 70
साल का सपना हो रहा साकार
लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद कारगिल के अध्यक्ष (सीईसी) फारूक खान ने कहा कि लद्दाखियों का 70 साल पुराना सपना साकार हो रहा है। प्रदेश को बारह महीने के संपर्क के अलावा पर्यटन विकास का नया मार्ग भी खुल रहा है। खान ने कहा कि जोजिला सुरंग निर्माण एजेंसी को स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता देनी चाहिए।