उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कट्टरपंथ बड़ी चुनौती है, जिससे निपटने के लिए धर्मगुरुओं को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए विशेष रणनीति के तहत काम करना होगा। वह बुधवार को छन्नी हिम्मत स्थित गुज्जर देश चैरिटेबल ट्रस्ट में जम्मू-कश्मीर राष्ट्रवादी जनमोर्चा की ओर से आयोजित सम्मेलन में डी-रेडिकलाइजेशन विषय पर बोल रहे थे।
सिन्हा ने कहा कि आधुनिक शिक्षा और तकनीक का प्रयोग करते हुए हर उस गतिविधि पर नजर रखनी होगी, जहां कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया जा रहा हो। इस प्रक्रिया में मुफ्ती, मौलवी समेत सामुदायिक स्तर पर प्रभावशाली अन्य शख्सियतों और प्रशासन की अहम जिम्मेदारी बनती है।
उन्होंने कहा कि कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाला कोई व्यक्ति विशेष हो या फिर विचारधारा, दोनों का प्रतिकार जरूरी है। सिन्हा ने कहा कि हमारा मकसद कट्टरपंथ के चंगुल में फंसे लोगोें को मुख्यधारा में वापस लाना होना चाहिए। इस अवसर पर वक्ताओं ने कश्मीरी पंडितों की घाटी वापसी के विषय पर भी विचार रखे।
कलाम, मकबूल शेरवानी पर लिखीं किताबों पर दें जोर
उपराज्यपाल ने कहा कि धार्मिक किताबों के उपदेशों से लेकर एपीजे अब्दुल कलाम, मकबूल शेरवानी और सलीम अली जैसी शख्सियतों पर लिखीं किताबों पर जोर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा मदरसों और स्कूलों में धार्मिक सौहार्र्द को विशेष रूप से पढ़ाया जाना चाहिए।