भले ही रफी आतंक की राह पर चलने के ठीक एक दिन बाद ही मार गिराया गया है। लेकिन वो बचपन से ही जिहादी मानसिकता का था। अपने दो चचेरे भाईयों के नब्बे के दशक में आतंकी बनने के बाद वो भी आतंकी बनने पाकिस्तान जाते हुए भी पकड़ा गया था।
हालांकि उस समय सुरक्षाबलों ने पकड़ कर उसे परिजनों के हवाले कर दिया था। जिसके बाद उसके पिता ने उसे आतंकी गतिविधियों से दूर रखने का काफी प्रयास किया था।
प्रोफेसर बनने के बाद खुश था परिवार
रफी के पिता को अक्सर ये चिंता सताती थी कि जिहादी मानसिकता वाले उसके इस बेटे का अंजाम क्या होगा। लेकिन जब उसकी नौकरी असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कश्मीर विश्वविद्यालय में लगी तो पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। पिता फैयाज अहमद भट ने चैन की सांस लेते हुए सोचा की अब आराम से जिंदगी का गुजर-बसर हो ही जाएगा।
पेपर में छापा था नोटिफिकेशन
उसके पीएचडी की डिग्री पूरी करने पर विश्वविद्यालय ने पेपर में एक इश्तिहार देकर इस बात की घोषणा की थी। जिसके मुताबिक उसने रेगुलर बेस पर पढ़ते हुए और सही समय पर अपनी थिसिस को जमा कर दिया है।