भ्रष्टाचार के मामले में फंसी पूर्व आईएएस अधिकारी नसीमा लंकर की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। 17 साल पुराने मामले में लंकर के खिलाफ जांच कर रहे एंटी करप्शन ब्यूरो की क्लोजर रिपोर्ट को एंटी करप्शन कोर्ट कश्मीर ने ब्यूरो को ही लौटा दिया है। रिपोर्ट से असंतुष्ट कोर्ट ने कहा है कि जांच एजेंसी इस रिपोर्ट की कमियों पर ध्यान देते हुए इसे फिर से जांचे।
जज आर एन वातल ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार देश का सबसे बड़ा दुश्मन है। ऐसे में जब कोई सरकारी नौकर ऐसा करे तो उसके खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। किसी सरकारी कर्मी का स्टेटस यह नहीं कहता कि उसके साथ किस तरह का व्यवहार करना है। यह मामला 17 साल पुराना है।
अमरनाथ यात्रा में तैनात होने वाले स्टाफ के लिए घटिया सामान खरीद में लंकर और एक अन्य अफसर निसार अहमद का नाम है। जज ने कहा कि जो दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए हैं, वो विवादित हैं। आरोपी के खिलाफ जो केस है, उसमें की गई जांच से कोर्ट संतुष्ट नहीं है।
कोर्ट ने मु़ख्य अभियोजना अधिकारी के जरिए इस रिपोर्ट को एंटी करप्शन ब्यूरो को वापस भेजने का आदेश दिया। जज ने कहा कि रिटायरमेंट के बाद अधिकारी को सैंक्शन नहीं दी जा सकती। बिना किसी कारण को स्पष्ट किए सैंक्शन नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने सर्वोच्च न्यालय के एक फैसले का भी हवाला दिया।