कोरोना संक्रमण के कारण लगातार दूसरे साल भी मंदिरों को आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है। मंदिर बंद तो नहीं हैं, लेकिन कोरोना कर्फ्यू के कारण श्रद्धालु नहीं पहुंच रहे। इससे सन्नाटा पसरा हुआ है। साथ ही दान पात्र खाली पड़े हैं। अप्रैल और मई में हिंदू धर्म के कई बड़े पर्व होने के बावजूद मंदिरों के दानपात्र खाली पड़े हैं, जिसका असर पुजारियों और मंदिरों में काम करने वालों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। पिछले साल की तरह इस वर्ष भी मंदिरों की आय नहीं हुई है, जिससे इनकी व्यवस्था लड़खड़ाने लगी है। पुजारियों के साथ प्रसाद और पूजा सामग्री बचेने वालों के सामने भी आर्थिक संकट गहरा गया है।
धार्मिक स्थल भी कोविड की मार से अछूते नहीं रहे हैं। मंदिरों में भक्तों के नहीं पहुंचने का असर मंदिर की आय पर पड़ा है। पुजारी, सफाई कर्मी सहित अन्य लोग, जिनकी आजीविका मंदिर पर निर्भर है, वे काफी प्रभावित हुए हैं। भगवान की कृपा से दो वक्त का खाना मिल रहा है, लेकिन स्थिति काफी चिंताजनक है। -दवारिका नाथ जोगी, महंत, आप शंभू मंदिर, रूपनगर जम्मू