जम्मू। मंदिरों के शहर जम्मू में रेहड़ी वालों की संख्या कोरोना महामारी के दौरान अचानक बढ़ गई है। इनमें से ज्यादातर लोग प्रवासी मजदूर या फिर छोटा-मोटा काम करने वाले शामिल हैं। रेहड़ी से आजीविका कमाने वाले इन नए लोगों की संख्या करीब एक हजार तक बताई जा रही है। यह बात रेहड़ी वालों के लिए केंद्रीय योजना को लेकर पंजीकरण प्रक्रिया में सामने आई है। हैरत की बात है कि नगर निगम के पास केवल 470 रेहड़ी वाले ही पंजीकृत हैं, जबकि गैर पंजीकृत रेहड़ी वालों की संख्या चार हजार के करीब पहुंच गई है। इसके अलावा शहर में तीन हजार के करीब पटरी (फड़ी) वाले हैं।
दरअसल, नगर निगम प्रति रेहड़ी अथवा खुले में सामान बेचने वालों से सालाना चार हजार रुपये की फीस लेेता है। शहर में रेहड़ी-पटरी से सामान बेचने वालों के लिए रेहड़ी जोन बनाया जाता है, ताकि उससे जाम की स्थिति न बने, लेकिन जम्मू शहर में रेहड़ी जोन की व्यवस्था नाममात्र ही लागू हो पाई है। ज्यादातर रेहड़ी वालों का पंजीकरण न होने से राजस्व घाटा भी हो रहा है। वर्तमान में ऐसे लोगाें को सरकारी योजना का लाभ देने में भी दिक्कतें आ सकती हैं, इसी के चलते नगर निगम ने पंजीकरण के लिए सर्वे किया है।
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मोहल्ले वार किया जा रहा पंजीकरण
अब मोहल्लों से लेकर शहर में घूमने वाले रेहड़ी वालों का भी पंजीकरण किया जा रहा है। पीएम निधि योजना के नाम पर पंजीकरण अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत लाभार्थियों को अपना कामकाज चलाने के लिए सरकार से आर्थिक मदद दी जानी है।
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कोट
अभी तक 470 रेहड़ी धारकों का ही नगर निगम के पास रिकॉर्ड है। शहर में अन्य जगहों में लगने वाले रेहड़ी धारकों का पंजीकरण किया जा रहा है। पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही असली आंकड़ा सामने आएगा। पंजीकृत रेहड़ी धारकों को ही अनुमति दी जाएगी।
- सुधीर बाली, एसीआर, नगर निगम जममू