जीएमसी में एक माह से खड़ी मोटरबाइक एंबुलेंस।
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जम्मू। जीएमसी जम्मू में एक माह पहले एक निजी कंपनी ने दो मोटरबाइक एंबुलेंस दान में दी थीं। इनसे शहर की संकरी गलियों और मोहल्लों तक अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाले मरीजों को पहुंचाया जाना या उन्हें लाना था। लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी यह मोटरबाइक एंबुलेंस अस्पताल में शोपीस बनकर रह गई हैं। इनमें एक मोटरबाइक एंबुलेंस को शवगृह के पास प्लास्टिक की शीट से ढककर रखा दिया गया है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि एक वाहन का प्रयोग किया जा रहा है, दूसरे के अभी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।
यह सुविधा मिलने से ऐसा लग रहा था कि संकरी गलियों वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए वरदान साबित होगी, लेकिन उद्घाटन के एक माह बाद भी ऐसी एंबुलेंस गली-मोहल्लों में अब तक नहीं दिखी। हालांकि मंगलवार को कुछ देर के लिए मोटरबाइक एंबुलेंस को बाहर निकाला गया था।
यह फर्स्ट रिस्पांडर वाहन फुल स्ट्रेचर से लैस है, जिसमें एक किनारे पर फोल्ड किए जाने लायक सिर को कवर किए जाने वाले हुड लगे हैं। इस वाहन में आवश्यक मेडिकल उपकरण भी उपलब्ध हैं। जिनमें फर्स्टएड किट, ऑक्सीजन सिलेंडर, आग बुझाने वाले उपकरण और अन्य सेफ्टी विशेषताएं मौजूद हैं। लेकिन इन मोटरबाइक एंबुलेंस का व्यापक स्तर पर उपयोग नहीं किया जा सका है। सामाजिक कार्यकर्ता सोमनाथ डबगोत्रा ने कहा कि ऐसी एंबुलेंस को इमरजेंसी के बाहर रखना चाहिए, ताकि किसी जरूरतमंद मरीज को इसका लाभ मिल सके।
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एक मोटरबाइक एंबुलेंस का मरीजों को घर पहुंचाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। कई मरीजों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया है, जबकि दूसरी मोटरबाइक एंबुलेंस के लिए दस्तावेज पूरे किए जा रहे हैं।
डॉ. दारा सिंह, अधीक्षक, जीएमसी