राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सैनिकों से मुलाकात करते हुए कहा कि आज आप सबको यह विश्वास दिलाने आया हूं कि हर देशवासी आपके परिवार की प्रार्थनाओं में, उनके कुशलक्षेम और बेहतर भविष्य के लिए सदैव उनके साथ खड़ा है। मातृभूमि की रक्षा में आप सब हमेशा दृढ़ रहें और आप को हर कदम पर विजय हासिल होती रहे यही मेरी कामना है।
उन्होंने कहा कि आप सभी जवानों और अधिकारियों से मिलने के लिए वे बहुत उत्सुक थे। सियाचिन दुनिया का सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित युद्धक्षेत्र है और यहां की कठोरतम जलवायु में सामान्य जीवन जीना ही कठिन है। ऐसी परिस्थिति में दुश्मन से युद्ध के लिए तत्पर रहना बहुत ही मुश्किल होता है।
कठोरतम प्राकृतिक चुनौतियों के बीच देश की रक्षा में लगे ऐसे वीर जवानों से आमने-सामने मिलना उनके लिए गर्व की बात है। आप सबसे मिलने की उत्सुकता का एक विशेष कारण था, आप तक यह संदेश पहुंचाना था कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सभी सैन्य कर्मियों और अधिकारियों के लिए हर भारतवासी के दिल में विशेष सम्मान है। देशवासियों के हृदय में आपकी वीरता के प्रति गर्व का भाव भी है।
इसलिए आज आप सबसे मिलकर बेहद खुशी हो रही है। इससे पहले थ्वाइस एयरफील्ड पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया। उनके साथ सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, नार्दर्न कमांड के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल डी अनबू भी थे।
सियाचिन के जवानों से मिलने का संकल्प हुआ पूरा
जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रपति और तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर के रूप में सैन्य बलों के लिए पूरे देश का आभार संदेश लेकर आए हैं। राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद दिल्ली से बाहर अपनी सबसे पहली यात्रा पर अपने सैनिकों से मिलने लद्दाख आया था।
सभी तैनात बटालियनों और स्काउट रेजीमेंट सेंटर के वीर जवानों से मिला था। उस समय ही संकल्प लिया था कि वे सियाचिन में तैनात अपने सैनिकों से भी मिलने जाएंगे। आज आप सभी के बीच आकर वह संकल्प पूरा हो रहा है।