राजनीतिक पार्टियां सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करती हैं, लेकिन जनता अब ब्यूरोक्रेट्स के रहमोकरम पर है। नई परिस्थितियों में लोगों में रोजगार और जमीन को लेकर डर बना हुआ है। इस पर स्थिति साफ होनी चाहिए। पर्यटन, उद्योग समेत अन्य आर्थिक गतिविधियां ठप हो गई हैं। केंद्र शासित प्रदेश के बजाय इसे राज्य का दर्जा देने की भी उपराज्यपाल से मांग की जाएगी।
घाटी के राजनीतिज्ञों का यह पहला जत्था होगा जो अनुच्छेद 370 हटने के बाद इस तरह की पहल कर रहा है। अब तक कश्मीर के किसी भी नेता की उपराज्यपाल से मुलाकात नहीं हो सकी है। इससे पहले कश्मीर के कारोबारियों के प्रतिनिधिमंडल ने उपराज्यपाल से मुलाकात कर कारोबार जगत को होने वाली परेशानियों से अवगत कराया था।
कश्मीर में नए सियासी मोर्चे की जरूरत है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू करने की सख्त आवश्यकता है। नए हालात में नई सोच के साथ निकलने की आवश्यकता है ताकि आम लोगों की जरूरतों को सुना जा सके। गुलाम हसन मीर, पूर्व विधायक पीडीपी