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जम्मू-कश्मीर में नए सियासी मोर्चे की तैयारी, सियासी गलियारे में जल्द ही उठापटक के भी आसार

Mon, 06 Jan 2020 03:09 PM IST
प्रशांत कुमार बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
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नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के सामने वजूद में आ सकता है तीसरा मोर्चा - फोटो : अमर उजाला
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नए केंद्र शासित प्रदेश में घाटी में नए सियासी मोर्चे के गठन की कवायद चल रही है। जल्द ही घाटी में नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के सामने तीसरा मोर्चा वजूद में आ सकता है। दिलचस्प है कि तीसरे सियासी विकल्प के तौर पर उभरने की कोशिश में जुटे इस दल में नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के नाराज पूर्व विधायक शामिल हैं। सात जनवरी को यह नेता उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस पहल से घाटी में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं।

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सूत्रों का कहना है कि प्रस्तावित इस नए मोर्चे का फिलहाल नाम तय नहीं हुआ है। लेकिन नेकां व पीडीपी के पूर्व विधायकों का ग्रुप इस दिशा में सरगर्मी से आगे बढ़ा है। यह ग्रुप कश्मीर के साथ-साथ जम्मू में भी ऐसे लोगों की तलाश कर रहा है जो समान विचारधारा के साथ आगे बढ़ सके। इस ग्रुप में पीडीपी के पूर्व विधायक अल्ताफ बुखारी, गुलाम हसन मीर, दिलावर मीर, जफर मन्हास के नामों की चर्चा है। वहीं, पीडीपी के एक राज्यसभा सांसद के भी इस ग्रुप में शामिल होने की चर्चा है।

गुलाम हसन मीर ने इस ग्रुप के उपराज्यपाल से मुलाकात कार्यक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि घाटी में सभी पार्टियों के आला नेता नजरबंद हैं। पांच महीने से राजनीतिक गतिविधियां बिल्कुल बंद पड़ी हुई हैं। इससे राजनीतिक शून्यता की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

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अनुच्छेद 370 हटने के बाद इस तरह की पहल करने वाला नेताओं का पहला जत्था

राजनीतिक पार्टियां सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करती हैं, लेकिन जनता अब ब्यूरोक्रेट्स के रहमोकरम पर है। नई परिस्थितियों में लोगों में रोजगार और जमीन को लेकर डर बना हुआ है। इस पर स्थिति साफ होनी चाहिए। पर्यटन, उद्योग समेत अन्य आर्थिक गतिविधियां ठप हो गई हैं। केंद्र शासित प्रदेश के बजाय इसे राज्य का दर्जा देने की भी उपराज्यपाल से मांग की जाएगी।

घाटी के राजनीतिज्ञों का यह पहला जत्था होगा जो अनुच्छेद 370 हटने के बाद इस तरह की पहल कर रहा है। अब तक कश्मीर के किसी भी नेता की उपराज्यपाल से मुलाकात नहीं हो सकी है। इससे पहले कश्मीर के कारोबारियों के प्रतिनिधिमंडल ने उपराज्यपाल से मुलाकात कर कारोबार जगत को होने वाली परेशानियों से अवगत कराया था।

कश्मीर में नए सियासी मोर्चे की जरूरत है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू करने की सख्त आवश्यकता है। नए हालात में नई सोच के साथ निकलने की आवश्यकता है ताकि आम लोगों की जरूरतों को सुना जा सके। गुलाम हसन मीर, पूर्व विधायक पीडीपी
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