कश्मीर में गुनगुनी ठंड के साथ कई जगहों पर हिंसा जारी थी। राष्ट्रपति के एक कार्यक्रम में पहुंचने की खबर मिलते ही घाटी में प्रदर्शन शुरू होने के साथ सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। अंदेशा था कि शायद ही इस स्थिति में मुख्य अतिथि पहुंचें। यह बात जब तत्कालीन राष्ट्रपति तक पहुंची तो उन्होंने किसी भी सूरत में आयोजन में भाग लेने का फैसला किया।
बात साल 2012 के सितंबर की है। काले कलर के गाउन और सफेद कमीज पहने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी कश्मीर विश्वविद्यालय के 18वें दीक्षांत समारोह में उत्साह से लबरेज होकर पहुंचे थे। जब सभागार में डिग्री बांट रहे थे तो छात्रों से स्थानीय परिवेश और अन्य चीजों के बारे में भी जानकारी ले रहे थे। उन्होंने जनता से हिंसा और संघर्ष की कड़वी यादों को पीछे छोड़कर नई सुबह की शुरुआत करने को कहा था। कहा कि आतंकी घटनाओं के बढ़ने से घाटी का विकास प्रभावित हो रहा है। इन सभी चीजों को खत्म करने के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों से कुशलतापूर्वक निपटने और तेज गति से समाधान किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया था। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने अपना पहला तीन दिवसीय दौरा कश्मीर का किया था। समारोह में गुलाबी पगड़ी पहने प्रणव ने समाज में बड़े पैमाने पर सहिष्णुता की आवश्यकता को रेखांकित भी किया था।
मुखर्जी की शालीनता देख श्रद्धालु हुए उत्साहित
जम्मू विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भी बतौर राष्ट्रपति प्रणव दा मौजूद रहे। 2 सितंबर 2014 को वह वैष्णो देवी दरबार में माता के दर्शनों को भी पहुंच थे। इस दौरान श्रद्धालु बेरोकटोक मां के दर्शन करते रहे। अपने बीच राष्ट्रपति की शालीनता को देखकर श्रद्धालु भी आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने कटड़ा में श्रीधर भवन लिफ्ट का उद्घाटन भी किया।
अमरनाथ यात्रियों पर हमले से थे नाराज
2017 में अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले की निंदा करते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति ने हमलावरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने को कहा था। अनंतनाग जिले में हुए हमले में सात लोग मारे गए थे।
शांति बहाली के लिए पाकिस्तान से की थी बातचीत
विदेश मंत्री रहते हुए प्रणव मुखर्जी ने पाकिस्तान यात्रा के दौरान वहां के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के सामने शांति बहाली के साथ आतंकवाद मुद्दे पर भी चर्चा की थी। वह कश्मीर मुद्दे को जल्द से जल्द हल करवाना चाहते थे।