पुंछ। पाकिस्तानी गोलाबारी में जान गंवाने वाली मेंढर के बालाकोट सेक्टर के गांव लंजोट निवासी रेशम बी (65 ) को अपने गांव की मिट्टी भी नसीब नहीं हुई। गोलाबारी के डर के चलते रेशम बी भी को 40 किलोमीटर दूर मनकोट तहसील के गांव सागरा के कब्रिस्तान में दफनाया गया। बताया जाता है कि वह यहां पली-बढ़ी थीं।
ग्रामीणों के अनुसार मंगलवार-बुधवार की दरम्यानी रात करीब दो बजे पाकिस्तान ने बालाकोट में गोलाबारी शुरू की। इस दौरान गांव लंजोट की रेशम बी की गोलाबारी में मौत हो गई और हाकम बी नामक दूसरी महिला घायल हो गई। उसे उपचार के लिए राजोरी रेफर किया गया है। पाकिस्तान की तरफ से दोबारा गोलाबारी शुरू होने की आशंका पर रेशम बी के परिजनों और ग्रामीणों ने पुश्तैनी गांव सागरा में रेशम बी को दफनाने का फैसला लिया। इसके बाद शव को लेकर मेंढर उपजिला अस्पताल पहुंचे, जहां कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद गांव सागरा पहुंचे। जहां दोपहर बाद नमाजे जनाजा अता कर रेशम भी को दफनाया गया।
-जनाजे में भीड़ जुटने पर गोलाबारी करता है पाकिस्तान
जनाजे में भाग लेने सागरा पहुंचे बालाकोट के लोगों का कहना है कि इससे पहले भी कई बार हम लोग ऐसा करते रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तानी सेना अकसर लोगों के जनाजों में जमा होने पर गोलाबारी शुरू कर देती है। गांव बालाकोट में 15 अगस्त 2012 में पाकिस्तानी गोलाबारी में गांव के सरपंच सहित मारे गए सात लोगों का जब दूसरे दिन नमाजे जनाजा पढ़ाया गया तो पाकिस्तानी सेना ने गोलाबारी शुरू कर दी। सभी लोगों को शव वहीं छोड़ भागना पड़ा। गोलाबारी थमने के बाद चंद लोगों ने ही मृतकों को सुपुर्द-ए-खाक किया था।