जम्मू। रेलवे स्टेशन पर पॉलीथिन का उपयोग प्रतिबंधित है। इसके बावजूद भी स्टेशन से निकलने वाले कचरे में बड़ा हिस्सा पॉलीथिन और प्लास्टिक का होता है। रेलवे स्टेशन पर पॉलीथिन मुक्त करने के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं। आलम यह है स्टेशन पर डस्टबिन की लेपिंग में पॉलीथिन का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि रेलवे का दावा है यह पॉलीथिन 50 माईक्रोन से ऊपर की है, जो प्रतिबंध की श्रेणी में नहीं आता है।
जम्मू रेलवे स्टेशन की स्वच्छता रैंकिंग में देश के चौथा सबसे स्वच्छ रेलवे स्टेशन की है। पिछले वर्ष रेलवे प्रबंधक ने रेलवे परिसर में पॉलीथिन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद पॉलीथिन का उपयोग हो रहा है। रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन पांच मीट्रिक टन के करीब कचरा निकल रहा है। इस कचरे में पॉलीथिन का बड़ा हिस्सा है। रेलवे प्रबंधक के तमाम दावों के बावजूद रेलवे स्टेशन को पॉलीथिन फ्री जोन बनाने की कवायद रंग लाती नगर नहीं आ रही है।
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नहीं लग पाई बाटल क्रशर मशीन
रेलवे स्टेशन प्रबंध के तमाम दावों के बीच रेलवे स्टेशन पर बाटल क्रशर मशीन नहीं लग पाई है। पिछले वर्ष लगाई बाटल क्रशर मशीन खराब होने पर उसे ठीक कराने भेजा था। रेलवे स्टेशन प्रबंधक का कहना है कि अब आधुनिक तकनीक की नई मशीन खरीदी जाएगी, लेकिन अभी तक इस ओर भी कोई पहल नहीं हुई है।
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पॉलीथिन प्रतिबंध के बाद 50 माईक्रोन से ऊपर के पॉलीथिन को उपयोग में लिया जा रहा है। अभी तक रेलवे स्टेशन को पूर्ण रूप से नो पॉलीथिन जोन नहीं बना पाए हैं, लेकिन प्रतिबंधित पॉलीथिन के उपयोग में कमी आई है।
-संजीव कुमार, रेलवे स्टेशन, हेल्थ इंस्पेक्टर