चेयरमैन गुलाम नबी सोफी ने कहा-हुर्रियत ने लोगों से जो वादे किए उस पर खरी नहीं उतरी
अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। घाटी में प्रतिबंधित संगठनों पर कार्रवाई का शिकंजा कसने से अलगाववादी खेमे में भगदड़ जैसे हालात बन गए हैं। ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एपीएचसी) की छतरी तले काम करने वाले अलगाववादी संगठन एक-एक कर उससे किनारा करते नजर आ रहे हैं। अब तहरीक-ए-इस्तिकलाल ने भी हुर्रियत की विचारधारा से खुद को अलग कर लिया है।
जम्मू कश्मीर तहरीक-ए-इस्तिकलाल के चेयरमैन गुलाम नबी सोफी (50) ने कहा कि उन्होंने खुद को और अपनी पार्टी को ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (जी) या (एम) या संबंधित विचारधारा वाले किसी भी अन्य समूह से अलग कर लिया है। जारी किए गए एक बयान में सोफी ने कहा, हमने तमाम बाधाओं के बावजूद अपना संघर्ष जारी रखा, लेकिन न तो एपीएचसी (जी) और न ही (एम) आम जनता की उम्मीदों को पूरा कर पाई। लोगों की आकांक्षाओं और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करने में हर कदम पर विफल रही।
मैंने पहले ही तोड़ लिया था संबंध
सोफी ने कहा, मैंने बहुत पहले अलगाववादी विचारधारा से अपने संबंध तोड़ लिए हैं और आज मैं आधिकारिक तौर पर इस विचारधारा की निंदा करता हूं। हमारे संगठन का नाम या मेरा व्यक्तिगत नाम अब से किसी भी व्यक्ति द्वारा हुर्रियत के किसी भी गुट के संबंध में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। ऐसा कोई भी प्रयास करने वाले व्यक्ति या संगठन के लिए गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।
मैं भारत का सच्चा और प्रतिबद्ध नागरिक...
सोफी ने कहा, मैं भारत का एक सच्चा और प्रतिबद्ध नागरिक हूं और भारतीय संविधान में विश्वास करता हूं। न तो अतीत में मैं किसी ऐसे कार्य से जुड़ा रहा हूं जो भारत के हितों के लिए हानिकारक रहा हो और न ही मैं या मेरा संगठन किसी ऐसे समूह या मंच का हिस्सा बनने का इरादा रखता है जो भविष्य में भारत के खिलाफ काम करेगा या कर रहा है।
आगे की रणनीति पर बाद में फैसला
अमर उजाला से फोन पर बात करते हुए तहरीक-ए-इस्तिकलाल के चेयरमैन गुलाम नबी सोफी ने कहा, मैं कुपवाड़ा के आरामपुरा का रहने वाला हूं। कॉलेज के बाद वह हुर्रियत में शामिल हुआ और तब से उनके साथ चल रहा था। मैंने 2018 में अपनी इस पार्टी का गठन किया। यह पूछे जाने पर कि क्या वह मुख्यधारा की राजनीति में शामिल होंगे, उन्होंने कहा- फिलहाल तो मैंने किनारा किया है। आगे क्या रणनीति रहेगी, उसपर बाद में फैसला लिया जाएगा।
ये संगठन भी कर चुके तौबा
जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक पॉलिटिकल मूवमेंट के एडवोकेट मोहम्मद शफी रेशी और जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट के शहीद सलीम ने मंगलवार को हुर्रियत से किनारा करने का एलान किया। गृह मंत्री अमित शाह ने एक पोस्ट में इसको लेकर लिखा था कि मोदी सरकार की एकीकरण की नीतियों ने अलगाववाद को खत्म कर दिया।