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अब हम चुनाव में, जनता तय करेगी पार्टी का भविष्य : शमीम

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जमात का दावा - जम्मू-कश्मीर में हर एक चुनाव लड़ेंगे
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अमृतपाल बाली
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में राजनीति में एक नया मोड़ देखने को मिला, जब प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के पूर्व सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर जस्टिस एंड डवलपमेंट फ्रंट की घोषणा की। फ्रंट के अध्यक्ष शमीम अहमद ठोकर ने विशेष बातचीत में कहा कि जमात की शुरू से ही लोकतंत्र में विश्वास की विचारचारा रही है, लेकिन हालात ने उन्हें चुनावों से दूर होने पर मजबूर किया। अब हमने निर्णय किया है कि केंद्र शासित प्रदेश में कोई भी चुनाव हो नतीजों की परवाह न किए बिना हम भाग लेंगे। राजनीतिक दलों ने इसका स्वागत किया है। उन्हें चुनना या नकारना लोगों का फैसला होगा।
ठोकर ने जमात की विचारधारा को लेकर पूछे जाने पर कहा, जमात की कोई अलग विचारधारा नहीं है। 1965 से लेकर 1987 तक हमने चुनावों में भाग लिया। 1987 के बाद इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया से लोगों का भरोसा तब उठा जब चुनावों में धांधली हुई। हमारे कैडर का भी इस पर से भरोसा उठ गया। अब लगा कि मुख्यधारा में शामिल होने के लिए माहौल ठीक है, क्योंकि बीते साल विधानसभा चुनाव निष्पक्ष तरीके से हुए। हमने उम्मीदवार उतारे। अब हमने यह रणनीति बनाई कि चाहे कोई भी चुनाव हों उनमें हम भाग लेंगे। हमारी कोशिश होगी कि लोगों को आश्वासन दिलाएं कि हमारा मुद्दा और मकसद क्या है। हम लोगों के बीच जाएंगे। हमने 21 अगस्त, 2024 को चुनाव आयोग को अपने दस्तावेज भेजे थे और वहां से स्वीकृति पत्र भी आया है, जो हमें जल्द हासिल होगा।
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क्या कहते हैं अन्य सियासी दल

इस बीच अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता रफी मीर ने कहा, जमात-ए इस्लामी संगठन पहले भी राजनीति में सक्रिय रहा रहा है। उसके बाद बहिष्कार किया था। सभी का हक है कि जम्हूरियत में भाग लें। उनको अगर मौका दिया जाए कोई हर्ज नहीं। फैसला ईसीआई और आपको नहीं करना, यह फैसला लोगों का है, किस तरह से वो उन्हें कबूलते हैं या नकारते हैं।
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पीडीपी के अतिरिक्त प्रवक्ता इकबाल त्रंबू ने कहा, लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक दल का आना स्वागत योग्य कदम है। जमात पहले भी चुनावों में भाग लेता रहा है। बीते विभानसभा चुनाव में जमात के कुछ सदस्यों ने निर्दलीय भाग लिया, क्योंकि जमात पर 2019 में प्रतिबंध लगाया गया था। अब उनमें से कुछ सदस्यों ने राजनीति में भाग लेने की इच्छा जताई है। यह अच्छी बात है।
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सीपीआईएम के वरिष्ठ नेता एमवाई तारिगामी ने कहा, पार्टियां बनाना या बदलना हर नागरिक का अधिकार है। जमात-ए-इस्लामी के बारे में इतना ही कहूंगा कि वह कई दशकों से सियासत में रही है और चुनाव भी लड़ें हैं। आज कुछ लोग इंसाफ की बात कर रहे हैं। इंसाफ करना बहुत बड़ी बात है। आज यह बदलाव क्यों।
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