पत्र लिखा- बढ़ेगा क्षेत्रीय असंतुलन, भाषाई भेदभाव और प्रशासनिक पक्षपात बढ़ेगा
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने उर्दू की अनिवार्यता को लेकर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को पत्र लिखा है। उन्होंने इसे गंभीर और संवेदनशील विषय बताते हुए क्षेत्रीय असंतुलन पैदा करने वाला बताया। तत्काल कार्रवाई का आग्रह करते हुए उर्दू की अनिवार्यता खत्म करने की मांग की है। राजकीय दस्तावेजों व प्रक्रियाओं का अनुवाद अन्य आधिकारिक भाषाओं में करवाने का आग्रह भी किया।
नेता प्रतिपक्ष ने लिखा कि जेकेएसएसबी की ओर से 75 नायब तहसीलदार पदों के लिए जारी अधिसूचना में उर्दू को एक बार फिर अनिवार्य बनाते हुए भाषाई भेदभाव और प्रशासनिक पक्षपात को बढ़ावा देने का काम किया है। नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, जम्मू संभाग की भाषाई संरचना भिन्न है। यहां हिंदी और डोगरी बोली, पढ़ी और सिखाई जाती है। अधिकतर स्कूल-कालेज में उर्दू या तो वैकल्पिक विषय के रूप में है या बिल्कुल नहीं है। इसके विपरीत कश्मीर संभाग में उर्दू भाषा को शैक्षणिक और प्रशासनिक मुख्यधारा में स्थान मिला है।
शर्मा ने कहा कि जब-जब उर्दू को अनिवार्य किया गया है, उसके दुष्परिणाम सामने आए हैं। 2019 में नायब तहसीलदार की परीक्षा में 817 उम्मीदवार थे, जिनमें से 126 केवल उर्दू विषय में फेल हुए थे। 122 अभ्यर्थी जम्मू संभाग से थे, जो प्रमाण है कि यह शर्त जम्मू क्षेत्र के लिए बाधा बन गई थी। नेता प्रतिपक्ष ने लिखा कि यदि इस पर पुनर्विचार न हुआ तो जनआंदोलन हो सकता है। ब्यूरो