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Jammu News: भाजपा से नजदीकी के आरोपों से बचने के प्रयास में नजर आए उमर

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मुख्यमंत्री ने भाजपा के आरोपों का चुन-चुन कर दिया जवाब, दूसरे विरोधी दलों के मुद्दों में सुर भी मिलाया
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सरकार बनने के बाद जिन विवादित मुद्दों से कर रहे थे किनारा, सदन में जमकर बोले
अमर उजाला ब्यूरो-अरुण कुमार
जम्मू। विधानसभा में उपराज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान उपमुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भाजपा के साथ अपनी नजदीकी के आरोपों से बचते दिखे। भाजपा के आरोपों का चुन-चुन कर जवाब देने के साथ-साथ उमर कश्मीर केंद्रित अपने विरोधी दलों के सुर में सुर मिलाते भी दिखे। सरकार बनने के बाद जिन विवादित मुद्दों पर उमर अभी तक किनारा करते थे, पहली बार सदन में उन मुद्दों पर भी उमर बिना किसी राजनीतिक नफे नुकसान के बोलते दिखे।
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अनुच्छेद 370, पीएसए (पब्लिक सेफ्टी एक्ट), गुज्जर- बकरवाल आरक्षण, 13 जुलाई और पांच दिसंबर की छुट्टी जैसे विवादित मुद्दों पर उमर ने बात की। पीडीपी, जेकेपीसी और भाजपा के हर आरोपों पर उमर अब्दुल्ला ने अपनी और अपनी पार्टी के विचारधारा को स्पष्टता से रखा। सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री के बार-बार दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री, गृहमंत्री से मुलाकात, इंडिया गठबंधन की आलोचना के कारण उनपर भाजपा के साथ नजदीकी के आरोप लगते रहते थे। इन मुद्दों के सहारे ही पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, जेकेपीसी अध्यक्ष सज्जाद लोन उमर सरकार को घेरते थे। सदन में इन मुद्दों पर उमर बाकी से बात कर इन दलों के एजेंडों पर विराम लगाते दिखे। बजट सत्र के पहले दिन उपराज्यपाल के अभिभाषण के बाद ही उमर सरकार भाजपा, पीडीपी और जेकेपीसी के निशाने पर थी। सज्जाद गली लोन ने उपराज्यपाल के अभिभाषण को सरकार की तरफ से भाजपा को प्रेम पत्र तक बताया दिया था। वीरवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री विपक्ष के हर हमले का जवाब दिया। भाजपा के प्रति अपने तल्ख रवैये से उमर यह दिखाते हुए दिखे केंद्र के साथ उनकी नजदीकी सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लोगों के विकास के लिए है। नेकां और भाजपा के बीच वैचारिक और राजनीतिक दूरी है, जिसमें फिलहाल कोई कमी नहीं आई है।
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