- नेकां प्रमुख बोले, सरकार अपनी मर्जी से काम करेगी, कोई भी शर्तें थोप नहीं सकता
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अनुच्छेद 370 कश्मीरियों के लिए नहीं था, वह डोगरों को बचाने के लिए था। महाराजा हरि सिंह ने 1927 में बनाया कानून हर नागरिक के अधिकारों की सुरक्षा के लिए था। उन्हें पता था की पंजाब के लोग अमीर हैं और वे जम्मू-कश्मीर में जमीन व नौकारियों पर कब्जे करेंगे। यह बात नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने बुधवार को पार्टी कार्यालय जम्मू में एक कार्यक्रम में कही।
उन्होंने कहा, 370 हटने पर जम्मू के लोगों ने खुशी मनाई, लड्डू बांटे थे। आज नौकरियां जम्मू-कश्मीर के लोगों केे लिए नहीं हैं। जमीनें जा रही हैं। कश्मीर कोई नहीं आएगा, क्योंकि इन लोगों को कश्मीरियों से डर लगता है। कहा कि मैं मुसलमान हूं, लेकिन मैं भारतीय हूं चीनी और पाकिस्तानी नहीं। फारूक ने कहा, सरकार चलाना आसान नहीं है। मुझे जम्मू से वोट नहीं मिला, लेकिन हर बार जम्मू को प्रतिनिधित्व दिया। पीडीपी अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए जिम्मेदार है। हमने मुफ्ती मोहम्मद सईद से कहा था कि वे सरकार गठन के लिए भाजपा में शामिल न हों। आज हमारी सरकार है, इसलिए लोग शामिल हो रहे हैं, लेकिन हमें अपने कार्यकर्ता को प्राथमिकता देनी होगी। कश्मीरी पंडितों पर पुनर्वास पर केंद्र को घेरा। कांग्रेस नेता सरकार के कामकाज की आलोचना के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार जानती है कि क्या करना है। सरकार अपनी मर्जी से काम करेगी। कोई भी सरकार पर अपनी शर्तें थोप नहीं सकता।
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आज से करे चुनाव की तैयारी
डॉ. फारुक अब्दुल्ला ने पार्टी कार्यकर्ताओं को स्थानीय निकाय व पंचायत चुनावों की तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा कि चुनावी की घोषणा जब भी हो हमें अभी से तैयारियों में जुट जाना होगा। विधानसभा चुनाव के दौरान लोग कहते है चुनाव नहीं होगा, लेकिन मैने तब भी कहा था चुनाव होगा। जब चुनाव आ गया तो कुछ लोग ऐसे हारे की उन्हें पता ही नहीं चला और कुछ ऐसे जीते उनकी उम्मीद ही नहीं थी। चाहे कोई जीता हो या हारा हो हमें एकजुट होकर काम करना होगा। लोगों की परेशानियों को दूरा करना होगा। प्रदेश को खुशहाल बनने के लिए सबको साथ लेना होगा। उन्होंने कहा कि देश को बाहर का नहीं अपने अंदर के लोगों से खतरा है। वो कहतें हिंदू खतरे में है लेकिन 80 फीसदी हिंदू को किससे खतरा होगा।
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डॉ फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कटड़ा-संगलदान रेल सेवा में कुछ महीनों की देरी होने की संभावना है। पर्यटन सीजन की शुरुआत के साथ अप्रैल में इसका परिचालन शुरू हो जाएगा। पत्रकारों से बातचीत करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि वह 25 जनवरी को ट्रेन से श्रीनगर जाने की तैयारी कर रहे हैं। मैंने सुना है कि कुछ अधूरे कार्यों के कारण ट्रेन (कश्मीर जाने वाली) दो महीने की देरी का सामना करेगी। पिछले वर्ष दिसंबर में रेल मंत्रालय ने उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेलवे लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना के पूरा होने की घोषणा की थी। यह कार्य कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने के लिए 1997 में शुरू किया गया था।
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