- आगामी विधानसभा बजट सत्र में अच्छे सुझाव और बेहतर चर्चा की उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में दस साल बाद नवनिर्वाचित विधायकों के लिए विधानसभा कार्यवाही सहित अन्य प्रक्रियात्मक गतिविधियों का प्रशिक्षण लाभदायक साबित होगा। इससे विधानसभा में सत्ता-विपक्ष में खटास कम होने के साथ जनता से जुड़े मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा। आगामी विधानसभा बजट सत्र में इसके बेहतर नतीजे देखने को मिलेंगे। विधायकों का कहना है कि प्रशिक्षण से उन्हें विधानसभा सहित अन्य आवश्यक गतिविधियों के लिए अनुभव हासिल हुआ है। जम्मू कश्मीर में करीब छह साल बाद बनी नई राज्य सरकार में 88 विधायकों में से 51 नए हैं।
सत्ता-विपक्ष में बेहतर वातावरण बनेगा-युद्धवीर
जम्मू पूर्व के विधायक युद्धवीर सेठी ने कहा मुझे पिछले 35 साल का संगठन या लोगों के बीच जाने का राजनीतिक अनुभव है। लेकिन पहली बार विधायक बनने के बाद विधानसभा की कार्यवाही और अन्य गतिविधियों का अनुभव नहीं था। लेकिन ओरिएंटेशन कार्यक्रम में बेहतर सीखने को मिला है। खासतौर पर पहली बार बने विधायकों के लिए यह नया अनुभव है। इसमें हमें जानकारी मिली है कि विधानसभा में समितियों की क्या भूमिका होती है। जनता से जुड़े प्रश्नों को कैसे प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे प्रशिक्षण से विधायक प्रभावी और बेहतर ढंग से प्रस्तुति दे सकेंगे। हमें बजट सत्र में अपने विधानसभा क्षेत्र का कैसे प्रस्तुत करना है, इसकी जानकारी मिलेगी। जब हम पहली बार श्रीनगर विधानसभा सत्र में गए थे तो सत्ता विपक्ष में सीधे टकराव की स्थिति थी, लेकिन पिछले दो दिन से दोनों ही पक्षों के विधायक आपस में बैठकर विचारों का आदान प्रदान, खाना खाना आदि गतिनिधियां कर रहे हैं, जो दोनों के बीच बेहतर वातावरण बनाता है।
उम्मीद है कि विधानसभा में धक्का मुक्की कम होगी-अरविंद
जम्मू पश्चिम अरविंद गुप्ता ने कहा कि प्रशिक्षण से हमें काफी कुछ सीखने को मिल रहा है। यह एक अच्छी पहल है और इसके भविष्य में अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे। विधायकों के अच्छे प्रशिक्षण से विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच धक्कामुक्की के बजाय जनता से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से उठाए जाने की उम्मीद है। विधानसभा में विधायकों की भूमिका काफी अहम होती है और ऐसे सत्र जनता के मुद्दों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। जिसमें उनके समाधान का रास्ता निकलता है। पीडीपी के अध्यक्ष दिवंगत मुफ्ती मोहम्मद सईद के समय यह प्रयास किए गए थे, जिसके बाद अब दूसरी बार यह पहल की गई है।
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विस क्षेत्रों के मुद्दों को प्रभावी ढंग से रखा जाएगा-राजीव
बिश्नाह से विधायक डा. राजीव कुमार भगत ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद विधायकों द्वारा संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के मुद्दों को विधानसभा में प्रभावी ढंग से रखने में मदद मिलेगी। उन्हें जानकारी होगी कि कौन से मुद्दे महत्वपूर्ण हैं और किस स्तर पर उन्हें रखा जाना है। इससे विधानसभा की कार्यवाही बेहतर ढंग से चलेगी और लोगों की आवाज को सुना जाएगा। हमें उम्मीद है कि सत्ता पक्ष भी विपक्ष के एजेंडों और मुद्दों को गंभीरता से लेगा।
विधानसभा एक संस्थान की तरह, नियमों का जानना जरूरी-मोहन लाल
अखनूर से विधायक मोहन लाल का कहना है कि ओरिएंटेशन प्रशिक्षण पहली बार बने विधायकों के लिए काफी लाभदायक होगा। विधानसभा एक संस्थान की तरह काम करता है और इसके नियमों को जानना विधायक के लिए जरूरी है। इसमें जनप्रतिनिधियों के तौर पर विधायकों को जनता से जुड़े मुद्दे रखकर उनके समाधान पर काम करना होता है। हमें विधानसभा की कार्यवाही के अलावा अन्य आवश्यक प्रशिक्षण दिए गए हैं। ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी पाकर विधायक जितना सशक्त होगा वे उतने ही प्रभावी ढंग से अपने विधानसभा क्षेत्र को लाभ पहुंचाएगा। प्रशिक्षण में देश के कई अहम राजनेताओं ने अनुभव साझा किए हैं।
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जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना विधायक का कर्तव्य-रंधावा
बाहु विधानसभा से विधायक विक्रम रंधावा ने कहा कि किसी भी विधायक के लिए संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना उसका कर्तव्य है। लेकिन इसके लिए उसे पूरी जानकारी होनी चाहिए कि किस राह से समाधान के रास्ते पर पहुंचा जाए और इसके लिए विधानसभा सबसे महत्वपूर्ण है। हमें प्रशिक्षण पाकर काफी कुछ सीखने को मिला है। इसमें कई चीजों के बारे में सुना था, लेकिन वास्तविक में प्रशिक्षण पाकर नए अनुभव हासिल हुए हैं।
विधायकों को आवश्यक प्रशिक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। लोकसभा सचिवालय के संसदीय शोध व प्रशिक्षण विधानसभा संस्थान लोकतंत्र (प्राइड) की ओर से जम्मू विधानसभा के सेंट्रल हाल में जारी अभिमुखीकरण (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम में शुक्रवार दूसरे दिन भी नवनिर्वाचित विधायकों को विधानसभा की कार्यवाही सहित अन्य आवश्यक प्रशिक्षण दिए गए। शनिवार भी प्रशिक्षण प्रक्रिया जारी रहेगी।
विधायकों को सांसद एनके प्रेमा चंद्रन और निदेशक लोकसभा सचिवालय पारथा गोस्वामी ने निजी सदस्य विधेयक सहित विधायी प्रक्रिया की जानकारी दी। इसके अलावा संसद की अनुदान मांग सहित वित्तीय कार्य के बारे में बताया गया। इसमें बताया गया कि वित्तीय कार्यों में विधायकों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। इसी तरह पूर्व राज्य मंत्री डा. सत्यपाल सिंह और संयुक्त सचिव लोकसभा सचिवालय संतोष कुमार ने विधायिकाओं में प्रश्नों और अन्य माध्यम से कार्यकारी जवाबदेही पर प्रकाश डाला। निदेशक प्राइड लोकसभा सचिवालय पीके मालिक ने प्रभावी विचार-विमर्श के लिए विधायकों को सूचनात्मक सहायता पर जानकारी दी। उन्होंने विधायकों से अनुभव साझा किए। इस दौरान स्पीकर अब्दुल रहीम राथर मौजूद रहे।
आंवला। वाल्व जो फट गया था-संवाद