- मुख्यमंत्री पंचायत चुनाव से पहले आगामी बजट में कर सकते हैं घोषणा
गौरव रावत
जम्मू। पंचायत व विधानसभा उपचुनाव से पहले पेश होने वाले बजट में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला महिलाओं के लिए बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान जारी किए घोषणापत्र में भी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने महिलाओं के लिए कई योजनाएं लागू करने का वादा किया था। हाल ही में एक शोध के अनुसार, महिला केंद्रित योजनाओं से देश में महिला मतदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ है। कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी इस तरह की योजनाएं लाने वाले दल को फायदा हुआ है। सीएम अब्दुल्ला भी पंचायत चुनाव से पहले यह दांव खेल सकते हैं।
अपने घोषणापत्र में नेकां ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की महिलाओं को 5,000 रुपये प्रतिमाह देने और सार्वजनिक परिवहन निःशुल्क करने की घोषणा की थी। महिला उद्यमियों के लिए वित्तीय सहायता देने के साथ कई वादों का जिक्र किया था। सूत्रों के अनुसार, सीएम आगामी बजट में किसी एक योजना पर अमल कर सकते हैं, जिससे महिलाओं को सीधा लाभ पहुंचे और नारी शक्ति नेकां की तरफ आकर्षित हो। उमर ने इन योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना भी शुरू कर दिए हैं।
देश के कई राज्यों में महिलाओं को सीधा लाभ पहुंचाने वाली योजनाएं गेम चेंजर रही हैं। मध्यप्रदेश में लाड़ली बहन योजना, झारखंड में मंईयां सम्मान योजना और महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री लाड़की बहिन योजना को चुनाव जीतने के पीछे बड़ा फैक्टर माना गया। इसी तरह कर्नाटक, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और गुजरात में भी अलग-अलग नामों से ऐसी योजनाएं चलाई जा रहीं हैं, जिनके माध्यम से सीधा महिलाओं के खाते में धनराशि पहुंचाई जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उमर सरकार भी कोई ऐसी योजना ला सकती है, जिससे महिलाओं को लाभ पहुंचे।
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महिला केंद्रित योजनाओं वाले राज्यों में बढ़ी महिला मतदाताओं की संख्या
एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा चुनाव 2014 से 2024 के बीच सरकारी योजनाओं के कारण महिला मतदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक दशक में नौ करोड़ से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। इनमें लगभग 58%, यानी करीब 5.3 करोड़ महिला मतदाता हैं। देश के 19 राज्यों में जहां महिलाओं के लिए खास योजनाएं लाई गईं, वहां महिला मतदाताओं की संख्या में औसतन 7.8 लाख की बढ़ोतरी हुई है। 2019 के बाद जिन राज्यों में ऐसी योजनाएं अच्छे से लागू नहीं हो पाईं, वहां औसतन 2.5 लाख महिला मतदाता ही बढ़ीं हैं।