- तीसरे दिन शिवसेना यूबीटी, अपनी पार्टी और पीडीपी नेताओं ने दिया समर्थन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू।
जम्मू-कश्मीर में पंजाबी को सरकारी कामकाज की भाषा का दर्जा देने की मांग को लेकर जम्मू में शुरू अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। मांग के समर्थन में राजनीतिक दलों, सिख संगठनों, युवा समूहों और विभिन्न वर्गों के लोगों का समर्थन मिला। सिख संगत का कहना है कि पंजाबी को जम्मू-कश्मीर के आधिकारिक भाषा बनाने पर विचार किया जाना चाहिए।
धरना स्थल पर पहुंचे शिवसेना (यूबीटी) के प्रदेश अध्यक्ष मनीष साहनी ने मांग का समर्थन किया। उन्होंने सिख संगत को किरपाण भेंट की और पंजाबी को आधिकारिक भाषा के ढांचे में शामिल करने की मांग के समर्थन में अंग्रेजी और पंजाबी में पत्र भी सौंपे।
अपनी पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री मनजीत सिंह ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी पंजाबी को मान्यता देने की मांग के साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी भी धरना स्थल पर पहुंचकर मांग का समर्थन करेंगे। पीडीपी प्रवक्ता वरिंदर सिंह ने भी समर्थन जताते हुए कहा कि पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती जल्द ही धरना स्थल पर पहुंचकर मांग के समर्थन में अपना पक्ष रखेंगी। ऑल जम्मू-कश्मीर सिख नौजवान सभा के अध्यक्ष रामनदीप सिंह और उनकी टीम ने भी धरने को समर्थन दिया।
आधिकारिक भाषाओं की सूची में पंजाबी को शामिल करें : तजिंदर सिंह
सामाजिक कार्यकर्ता सरदार तजिंदर सिंह ने प्रदेश सरकार से पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने के लिए स्पष्ट और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार 5 अगस्त, 2019 के बाद बदले गए अधिकारों और संस्थानों की बार-बार बात करती है, तो उसे आधिकारिक भाषाओं की सूची से पंजाबी को बाहर रखने के मुद्दे को भी संबोधित करना चाहिए। पंजाबी भाषा का मुद्दा अब उस स्तर पर पहुंच गया है, जहां केवल सहानुभूति व्यक्त करना या प्रतिनिधिमंडल भेजने का आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सरकार से जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा अधिनियम, 2020 में उचित संशोधन विधानसभा के समक्ष लाने और पंजाबी को औपचारिक रूप से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की आधिकारिक भाषाओं में शामिल करने का आग्रह किया।
धरनास्थल से खास-खास
1-पंजाबी को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाओं की सूची में शामिल किया जाए। सरकारी कामकाज, प्रशासनिक संचार में पंजाबी को भी आधिकारिक भाषा का दर्जा मिले।2-पंजाबी शिक्षा को सरकारी स्कूलों में पर्याप्त अवसर मिले। स्कूल स्तर पर पंजाबी की पढ़ाई को मजबूत करें।
3-पंजाबी भाषा और उससे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए सरकारी स्तर पर कदम उठाए जाएं।