जम्मू। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में राज भाषाओं के मामले में केंद्र सरकार ने प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं के साथ न्याय किया है। डोगरी और कश्मीरी भाषा को प्रदेश के 73 फीसदी लोग बोलते हैं।
नई दिल्ली में बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा में पारित हुए जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा बिल 2020 बारे पत्रकारों से बातचीत में मंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य में 1957 में उर्दू और अंग्रेजी को राजभाषा बनाया गया था। उर्दू और अंग्रेजी को जम्मू कश्मीर की करीब एक फीसदी जनसंख्या ही बोल पाती है।
केंद्र सरकार ने विसंगतियों को दूर करने का काम किया है। कश्मीरी भाषा को जम्मू कश्मीर में 53 फीसदी और डोगरी भाषा को करीब 20.64 फीसदी लोग बोलते हैं। इसके अलावा राष्ट्र भाषा हिंदी को भी जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में लोग बोलते हैं। उनका कहना है कि इन तीन भाषाओं के अलावा गोजरी को नौ फीसदी और पहाड़ी भाषा को आठ फीसदी लोग बोलते हैं। इसके बाद पंजाबी भाषा का नंबर आता हैं। पंजाबी, गोजरी और पहाड़ी भाषाओं की समृद्ध विरासत है। सरकार इन भाषाओं को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम करेगी।