जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत या बहुमत के करीब का आंकड़ा न मिलने की वजह से गठबंधन सरकार का ही विकल्प शेष बचा है। ऐसे में सियासी गलियारों में पीडीपी और भाजपा गठबंधन पर चर्चाओं को बाजार गर्म है।
विधानसभा की कुल 87 सीटों में से पीडीपी सबसे बड़े दल के रूप में तो उभरकर आई है, लेकिन उसे 28 ही सीटें हासिल हुई हैं। इनमें अधिकतर सीटें कश्मीर संभाग से ही मिली है। इसी तरह भाजपा का सीटों के मामले में दूसरा नंबर है। भाजपा को 25 सीटें मिली हैं लेकिन यह सभी सीटें जम्मू संभाग से ही हैं। वोट प्रतिशत के मामले में भाजपा सबसे आगे रही है।
नेशनल कांफ्रेंस को सीटों के मामले में तीसरा स्थान के साथ 15 सीटें हासिल हुई है। कांग्रेस का नंबर चौथा रहा है। उसे 12 सीटें हासिल मिली हैं। सीपीआई को एक व अन्य को छह सीटें हासिल हुई हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए 44 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए एक मात्र विकल्प गठबंधन का ही बचा हुआ है।
भाजपा और पीडीपी राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार गठन के लिए ओर समय मांग चुकी है। दिलचस्प बात तो यह है कि पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 55 विधायकों के समर्थन का दावा करने के बावजूद सरकार गठन के लिए भाजपा से गठबंधन के संकेत दिए है।
वहीं भाजपा ने भी राज्यपाल एन एन वोहरा से सरकार गठन के लिए ओर समय मांगा है। प्रदेशाध्यक्ष जुगल किशोर शर्मा का कहना है कि जन मत का सम्मान होना चाहिए। स्थायी सरकार के गठन के लिए जल्दबाजी नहीं होगी। इससे साफ है कि भाजपा भी पीडीपी को ही गठबंधन के लिए प्राथमिकता दे रही है।