जब आप पीएचई मंत्री थे तब क्या किया : उमरविधानसभा में मंगलवार को भाजपा विधायकों के आरोपों पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर हमारा अस्थायी कर्मियों के साथ बात करने का इरादा न होता तो हम समिति क्यों बनाते। हमने आंदोलन के बाद समिति नहीं बनाई है। हैरानी यह है कि समिति बनने के बाद आंदोलन शुरू हुआ है।
इसके बीच क्या कारण है, यह मैं पता करूंगा। भाजपा के लोग अस्थायी कर्मियों के लिए इंसाफ की बात कर रहे हैं, तो दस वर्षों में भी नाइंसाफी हुई है। अगर हम इस बात पर चर्चा करेंगे कि तुमने क्या किया मैंने क्या किया, तो मैं शाम लाल शर्मा से पूछता हूं कि जब वह पीएचई मंत्री थे, तो उन्होंने क्या किया।
उमर का गणित खराब, सरकार घमंड से चूर, दुर्भाग्यपूर्ण : सुनील
नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि सरकार घमंड से चूर है। दैनिक वेतनभोगियों के प्रति सरकार का रवैया निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का गणित खराब है। वह हर बात पिछले दस साल से जोड़कर कर रहे हैं। भाजपा सरकार गठबंधन में तीन साल ही रही। हमने हाईपावर समिति बनाई, 520 एसआरओ लाया, जिसके तहत दैनिक वेतन भोगियों को स्थायी करने का प्रावधान था।
उपराज्यपाल ने कर्मियों का मानदेय बढ़ाकर वेतन 9350 रुपये किया। सरकार फिर समितियां बनाकर अस्थायी कर्मियों को गुमराह कर रही है। अगर ऐसा है तो उन्हें पहले की बनाई समिति की सिफारिशों पर काम करना चाहिए। हमने कई बार विधानसभा में सरकार से आंदोलित कर्मियों के साथ बातचीत का आह्वान किया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।