सांबा। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि पश्चिमी पाकिस्तान के दो शरणार्थी डॉ. मनमोहन सिंह और इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री रह चुके हैं, लेकिन विरोधाभास यह भी रहा है कि इसी श्रेणी के अन्य शरणार्थी जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में रहने का विकल्प चुना, उन्हें यहां के विधानसभा चुनाव में मतदान करने या चुनाव लड़ने का अधिकार प्रदान नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के साथ ही इन विसंगतियों को समाप्त कर दिया। अब जम्मू और कश्मीर में रहने वाला कोई भी पाकिस्तानी शरणार्थी चुनाव लड़ सकता है और विधायक या मंत्री और यहां तक कि मुख्यमंत्री बनने की आकांक्षा भी रख सकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह जम्मू के निकट अंतर्राष्ट्रीय सीमा (आईबी) के नजदीक आयोजित पश्चिम पाकिस्तान के शरणार्थियों की एक रैली को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले वे ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह के पैतृक गांव बगूना गए, जो 1947 में हुए पाकिस्तानी हमले में शहीद हो गए थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिन शरणार्थियों को पाकिस्तान से उखाड़ फेंका गया। विभाजन के बाद हुए दंगों में इन्होंने अपने कई परिजनों को भी खोया है। पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी भी कराची के निवासी थे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू और उसके आसपास के इलाकों में बसे पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों को विसंगतियों की समाप्ति के लिए 72 वर्षों का लंबा इंतजार करना पड़ा।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुभकामनाएं देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्यक्रम का आयोजन करने में वयोवृद्ध कार्यकर्ता लाबा राम गांधी के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) आरके शर्मा ने भी संबोधित किया।