शहरवासियों को ई-रिक्शा का सस्ता और सुगम सफर की सुविधा अभी तक नहीं मिल सकी है। शहर में ई-रिक्शा के परिचालन को लेकर पॉलिसी तैयार है, रूट्स निर्धारित हैं, ई-वाहनों का पंजीकरण शुल्क भी माफ कर दिया है।
इसके बावजूद शहर में ई-रिक्शा का परिचालन नहीं बढ़ पाया है, जबकि सरकार ने 2019 में शहर में ई-रिक्शा को बढ़ावा देने का फैसला लिया था, लेकिन तीन साल बाद भी ई-रिक्शा चलाने की कवायद परवान नहीं चढ़ पाई है। आरटीओ जम्मू में चार ई- रिक्शा का ही पंजीकरण हुआ है।
2019 में रीजनल ट्रांसपोर्ट अथारिटी जम्मू ने परिवहन और ट्रैफिक विभाग को ई-रिक्शा के परिचालन के लिए रूट्स को चिह्नित करने के लिए कहा था, इसकी रिपोर्ट 2020 में सौंप दी गई थी। जम्मू शहर में ई-रिक्शा को पहले कुछ माह ट्रायल पर चलाया गया था।
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अब विभाग ने इसके परिचालन के लिए रूट्स भी चिह्नित किए हैं, जिसमें शास्त्री नगर, गांधीनगर, रूप नगर, एशिया से बेलीचराना सहित ऐसे रूट्स हैं, जहां पर सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही कम होती है।
शहर में ई-रिक्शा चलाने को लेकर कुछ कंपनियों ने इच्छा जताई थी। वर्तमान में आरटीओ जम्मू में चार ई-रिक्शा का ही पंजीकरण हुआ है। परिवहन विभाग का कहना है कि लोगों की रुचि कम है, शायद यह कोविड के कारण भी हो सकता है।
सफर सस्ता होगा
शहर में ई-रिक्शा चलाना फायदे का सौदा होगा। ई-रिक्शा का पंजीकरण करवाने पर पंजीकरण शुल्क नहीं देना होगा, क्योंकि सरकार ने ई-वाहनों पर पंजीकरण शुल्क माफ किया है। ई- रिक्शा के लिए ऐसे रूट्स को चिह्नित किया गया है, जहां मेटाडोर कम चलती है, ऐसे में इस क्षेत्र में सेवाएं देने से लाभ होगा। ई-रिक्शा का सफर ऑटो रिक्शा के मुकाबले सस्ता होगा, ऐसे में लोग ई-रिक्शा में सफर करना पसंद करेंगे।
ई-रिक्शा की पॉलिसी भी तैयार है, अब कोई भी पंजीकरण करवा सकता है, जिसमें उसे पंजीकरण शुल्क भी नहीं देना होगा। लोगों का रुझान कम है, अभी तक तीन से चार ई-रिक्शा ही पंजीकृत हुए हैं। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। कोविड के कारण शायद लोग कम रुझान दिखा रहे हैं। -धनंतर सिंह, आरटीओ जम्मू