सूत्रों के अनुसार काम करवाने के लिए सचिवालय में तैनात अधिकारी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। एक के बाद एक प्रोजेक्ट हाथ से जा रहे हैं। पहले स्लाटर हाउस प्रोजेक्ट पांच साल कार्रवाई न होने पर कैंसिल हो गया। अब अमृत योजना का 15 करोड़ लैप्स हो गया है।
आय सीमित, प्रोजेक्टों का पैसा हो रहा लैप्स
मौजूदा समय में नगर निगम के आय स्त्रोत सीमित हैं। कुल 17 करोड़ आय साल में अर्जित होती है। केंद्र से मिलने वाली योजनाओं पर ही विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। अब विभागीय कार्रवाई और अफसरशाही के कारण प्रोजेक्ट हाथ से जा रहे हैं।
- योजना से शहर में नाले, नालियां, सीवरेज, पानी, ग्रीन पैच, बिजली और पानी के प्रोजेक्टों पर काम हो सकता था। मौजूदा समय में सीवरेज का काम बजट के अभाव में रुका पड़ा है। यूईईडी के पास राशि न होने के कारण शहर में काम शुरू नहीं हो रहा है। वहीं, सिरदर्द बने नालों पर भी काम मंद गति से चल रहा है। प्रोजेक्ट न बनने के कारण राशि लैप्स हुई है। कम समय में प्रोजेक्टों पर प्रस्ताव और टेंडर नहीं हो सकते थे। नगर निगम की ओर से पूरी कोशिश की गई है। - सुुधीर बाली, एसीआर (अतिरिक्त कार्यभार संयुक्त आयुक्त), जेएमसी
- सरकार का पैसा लैप्स हो रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। कमजोर नेतृत्व, लापरवाह अधिकारी और कमजोर प्रणाली का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। योजना का पैसा खर्च करने के लिए नवंबर और मार्च में हुई हाउस बैठकों में मसले को रखा गया था। इसके बावजूद भी पैसा लैप्स हुआ। किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। - राजेंद्र शर्मा, चेयरमैन हाउसिंग कमेटी, जेएमसी
- अमृत योजना के तहत 15 करोड़ रुपये लैप्स हुए हैं। अब दोबारा से आवेदन किया जाएगा। नए बजट से ही योजना के तहत काम हो पाएंगे। सेविंग खाते से पैसा लैप्स हुआ है। - टीना महाजन, सचिव, नगर निगम