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Jammu News: तीन आपराधिक कानूनो के प्रति लोगों को जागरूक करेगी पुलिस

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अमर उजाला ब्यूरो
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जम्मू। संसद द्वारा पारित तीन नए आपराधिक कानून के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस आठ लाख रुपये खर्च करेगी। डीजीपी जम्मू-कश्मीर आर.आर स्वैन ने प्रदेश के सभी जिलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए इस राशि को मंजूरी दी है।
तीन आपराधिक कानूनों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) जो भारतीय दंड संहिता 1860 दंड प्रक्रिया संहिता, 1898 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की जगह लेंगे और एक जुलाई 2024 से लागू होंगे। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी एक आदेश के तहत आम जनता विशेष रूप से स्कूल कॉलेजों के विद्यार्थियों के साथ-साथ महिलाओं को जागरूकता किया जाएगा। इसमें शिविर, बहस आयोजित की जाएगी। जम्मू-कश्मीर के 3 पुलिस जिलों सहित 23 जिलों के लिए 8.23 लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। जागरूकता कार्यक्रमों से अधिकतम लोगों तक पहुंचने के लिए, जिला पुलिस प्रमुखों को उपमंडल स्तर पर कार्यक्रमों को आयोजित करने का निर्देश दिया गया है।
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नए कानून में ये हैं लोगों से जुड़े प्रावधान
नए कानून में इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड, ई-मेल, सर्वर लॉग, कंप्यूटर, स्मार्ट फोन, लैपटॉप, एसएमएस, वेबसाइट, स्थानीय साक्ष्य, मेल, उपकरणों पर संदेश को शामिल करने के लिए दस्तावेजों की परिभाषा का विस्तार करते हैं। इनमें एफआईआर से लेकर केस डायरी, केस डायरी से लेकर आरोप पत्र और आरोप पत्र से लेकर फैसले तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने का प्रावधान किया गया है। तलाशी और जब्ती के समय वीडियोग्राफी अनिवार्य कर दी गई है जो केस का हिस्सा होगी और इसमें निर्दोष नागरिकों को नहीं फंसाया जाएगा, पुलिस द्वारा ऐसी रिकॉर्डिंग के बिना कोई भी आरोप पत्र मान्य नहीं होगा। ई-एफआईआर का प्रावधान पहली बार जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक जिला और पुलिस स्टेशन एक पुलिस अधिकारी को नामित करेगा जो गिरफ्तार व्यक्ति के परिवार को उसकी गिरफ्तारी के बारे में आधिकारिक तौर पर ऑनलाइन और व्यक्तिगत रूप से सूचित करेगा। यौन हिंसा के मामलों में पीड़िता का बयान अनिवार्य कर दिया गया है और यौन उत्पीड़न के मामलों में बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग भी अनिवार्य कर दी गई है।
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