आपराधिक मामलों की जांच की समीक्षा करते हुए डीजीपी ने कहा कि केसों को प्राथमिकता के आधार पर निपटारे के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग जरूरी है।
डीजीपी के राजेंद्रा बुधवार को पुलिस हेडक्वार्टर में क्राइम विंग के प्रोग्रेस की समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान कई आपराधिक मामलों पर विचार विमर्श हुआ और डीजीपी ने जांच अधिकारियों को कहा कि जांच प्रभावशाली ढंग से होनी चाहिए, ताकि दोषी निम्न स्तरीय जांच के कारण कानून से नहीं बच सके।
डीजीपी ने कहा कि अपराधों का पता लगाना और उसका निवारण करना पुलिस की बड़ी जिम्मेदारी है। क्राइम विंग स्पेशल केस की जांच में अहम भूमिका निभाकर दोषियों को कानून के शिकंजे में ला रहा है।
उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी न्यूनतम तकनीक का पूरा उपयोग करें, ताकि जांच तेजी और पारदर्शी तरीके से हो सके। राजेंद्रा ने अफसरों को आदेश दिए कि अपराध के बदलते परिवेश के साथ पुलिस को भी अपनी जांच तकनीक में बदलाव करना होगा। आईजीपी (क्राइम) मुनीर अहमद खान ने वर्ष 2015 में विभाग की उपलब्धियों और विकास की रिपोर्ट पेश की।
इस मौके पर डीआईजी क्राइम जानी विलियम्स, डायरेक्टर प्रोसिक्यूशन (पुलिस हेडक्वार्टर) पवन गुप्ता, एसएसपी क्राइम जम्मू मुब्बसर लतीफी, एआईजी पर्सनल ताहिर सज्जाद और अन्य पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।