पुलिस पाठशाला में मुख्य अतिथि डीआईजी अशकूर वानी ने सही औैर गलत के बीच कानून के अलग-अलग पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सही है तो उसमें कानूून का कोई उपयोग नहीं है। जब कुछ भी गलत होता है तो कानून अपना काम करता है।
अक्सर लोगों की धारणा है कि कानून को विधायिका या सरकार बनाती है, जबकि कानून तभी बनता है, जब समाज में फैली कुरीतियों को रोकने के लिए कार्रवाई की जाए। लोग अपनी गलतियों को कम करना शुरू करें तो कानून का उपयोग भी कम हो जाएगा।
देश में सवा सौ करोड़ की आबादी है। पुलिस के प्रति सौ करोड़ धारणाएं होंगी। जम्मू कश्मीर संवेदनशील राज्य है। इस मौके पर स्कूल के चेयरपर्सन हन्दिर महाजन, वाइस चेयरमैन साहिल महाजन, प्रिंसिपल रमेश और 250 छात्र मौजूद थे।
डीआईजी ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने की पुलिस की धारणा आम लोगों में अब भी बनी है, जबकि पुलिस समाज के हर वर्ग में जाकर समाज कल्याण और उद्धार की नीति अपनाती है। स्कूल में बच्चों का आधार मजबूत बनाने के लिए शिक्षा दी जाती है। बारहवीं के बाद विद्यार्थी कानून की पढ़ाई के लिए आगे आते हैं। बचपन से घर में ही सही और गलत की जानकारी दी जाती है।
बड़े हो जाते हैं तो कानूनी अधिकार बढ़ जाता है। कानून का मुख्य उद्देश्य समाज की सेेवा करना है। अगर स्कूल के बच्चों में पुलिस या पुलिस के काम को लेकर कोई अवधारणा है तो उसे भी दूर किया जा सकता है। पुलिस थाने में जाकर बच्चे कानून और पुलिस कार्यप्रणाली की जानकारी हासिल कर सकते हैं। पुलिस आम लोगों की सुविधा के लिए है।
व्यवहार को देखती है और उनका काम लोगों में दहशत फैलाना नहीं है। कानून में संशोधन की गुंजाइश अक्सर बनी रहती है। देश में काफी पिछड़े लोग भी हैं। जहां कानून का उपयोग करनी के बजाय पुलिस आपसी सहयोग से मसलों को सुलझाती है। लोगों को पुलिस से दहशत नहीं होनी चाहिए।
किसी भी शिकायत को लेकर सीधे पुलिस थाने या अधिकारियों के पास आना चाहिए। समाज में अगर कुछ भी गलत हो रहा हो और शांति भंग हो रही है तो पुलिस जवान की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह उसे रोके।
अमर फाउंडेशन की तरफ से बनयान ट्री इंटरनेशनल स्कूल में पुलिस पाठशाला के आयोजन में बच्चों ने भी सवाल किए। इस मौके पर स्कूल के चेयरमैन साहिल महाजन ने कहा कानून की जानकारी बच्चों में शुरू से होनी चाहिए और कानून के विभिन्न पहलुओं की जानकारी के लिए ऐसे आयोजन सराहनीय हैं।