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Jammu News: जर्जर छतें और लटकते तार ऐसे आवासों में रह रहे जनता के रखवाले

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अखनूर। आम जनता की सुरक्षा में तैनात जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों के परिवार खुद असुरक्षित हालात में रहने को विवश हैं। अखनूर थाने के पास स्थित पुलिस हाउसिंग क्वार्टर्स की हालत इतनी खस्ता है कि हर वक्त उनके परिवारों को खतरा सता रहा है। निर्माण के चार दशक के भीतर ही इन आवासों की हालत जर्जर हो चली है। वर्ष 1988 में बनाए गए इन क्वार्टर्स की दीवारों से सीमेंट झड़ चुका है, दीवारों में दरारें आ गई हैं और जगह जगह झाड़ झंखाड़ उग आए हैं।
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अखनूर के पुलिस आवास की आधारशिला 29 अप्रैल 1988 को तत्कालीन पुलिस सलाहकार एवं डीजीपी जी.जे. पंडित ने रखी थी। इसके निर्माण के चार दशक भी नहीं पूरे हुए कि ये आवास खंडहर में तब्दील होने शुरू हो चुके हैं। जगह-जगह से दीवारें टूट चुकी हैं। छतों से सरिया बाहर निकल आए हैं. बरसात के मौसम में पुलिस जवानों को कमरे के भीतर छाता लगाकर बैठना पड़ता है। नाम न छापने के अनुरोध पर कुछ पुलिस कर्मियों ने बताया कि वे ड्यूटी से लौटने के बाद रात को सोते हैं तो नींद नहीं आती है। डर लगा रहता है कि कहीं छत न गिर जाए।

इन क्वार्टर्स में बिजली की वायरिंग पूरी तरह से खराब हो चुकी है। जगह जगह लटकते हुए तार, खुले जंक्शन बॉक्स और टूटे हुए बोर्ड किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। सुरक्षा बलों के जवान और उनके परिवार हर वक्त डर के साए में रहते हैं।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक इन आवासों के मेंटिनेंस का जिम्मा लोक निर्माण विभाग पर है। पर यहां के जिम्मेदार अभियंताओं ने आज तक इस इमारत का तकनीकी सर्वे तक नहीं कराया है कि ये आवास रहने योग्य भी या नहीं। मरम्मत की कौन बात करे इसका मुआयना तक नहीं होता।

थानाप्रभारी और एसडीपीओ जैसे वरिष्ठ अधिकारी निजी फ्लैट या अलग से आवंटित आवासों में रहते हैं। दूसरी ओर हवलदार, कांस्टेबल जैसे पदों पर तैनात पुलिस कर्मियों के पास इस जर्जर इमारत में रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह सिर्फ एक इमारत की बात नहीं, यह उन लोगों की समस्या है जो हमारी रक्षा करते हैं। इस ज्वलंत समस्या की अनदेखी पूरे तंत्र की विफलता को दर्शाती है।


नाम न छापने के अनुरोध पर पुलिस कर्मियों ने कहा कि जहां एक तरफ सरकारें पुलिस बलों के आधुनिकीकरण और कल्याण की बात करती हैं, वहीं जमीनी हकीकत इससे उलट नज़र आती है। एक तरफ जवानों से 24 घंटे ड्यूटी की उम्मीद की जाती है, वहीं उन्हें रहने के लिए एक सुरक्षित छत तक मुहैया नहीं कराई जा रही।

पुलिस कर्मी बोले हम जनता की सुरक्षा के लिए हर मौसम, हर परिस्थिति में मुस्तैद रहते हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम खुदअपनी सुरक्षा के लिए तरस रहे हैं। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि इस दिशा में तुरंत कदम उठाए जाएं — इमारत की स्थिति की इंजीनियरिंग जांच हो, जरूरत पड़ने पर इसे खाली कराया जाए और जवानों के लिए वैकल्पिक सुरक्षित आवास की व्यवस्था करने की जरूरत है।

इस संबंध में पूछने पर एसडीपीओ अखनूर वरिंदर गुप्ता ने कहा कि समय समय पर नवीकरण कार्य होते रहते हैं। हाल ही में एसडीपीओ दफ्तर और पुलिस थाने का नवीकरण किया गया। जल्द पुलिस हाउसिंग क्वाटर्स के नवीकरण के लिए भी उचित कदम उठाए जाएंगे।
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