पाटिल ने कहा कि 25 फरवरी 2020 को मामले की प्रारंभिक सूचना मिली थी जिसमें बर्न के नायब सरपंच सौदागर सिंह और बाबा चंचल सिंह समेत उसके भाइयों पर घर में घुसकर हत्या करने का आरोप लगाया गया। बताया गया कि यह लोग हथियाराें से लैस होकर सरपंच के घर में घुस आए और खून खराबा किया। हमले में सरपंच के मौसेरे भाई कश्मीर सिंह की मौके पर मौत हो गई थी।
एसएसपी ने बताया कि गहराई से जांच करने पर पता चला कि नायब सरपंच सौदागार सिंह और उसके आठ भाइयों को फंसाने के लिए एक फर्जी मामले की साजिश रची गई। इसमें मुख्य आरोपी शंकर सिंह ने मौसेरे भाई को गैर लाइसेंसी 12 बोर की बंदूक से गोली मार कर उसकी हत्या कर दी। भाई सरपंच दलबीर और बहन गीता देवी को रक्षात्मक तरीके से गोली मारकर घायल किया।
पुलिस ने 2 मार्च को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम(सिट) का गठन किया तो नए सिरे से जांच में पूरे मामले की हकीकत सामने आ गई। जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं के बयान शक के दायरे में आ गए। कड़ी पूछताछ हुई तो शंकर सिंह ने गहरी साजिश का राज उगल दिया। इसके बाद सरपंच दलबीर सिंह और अन्य लोगों ने भी आखिरकार अपना जुर्म कबूल कर लिया। बंदूक भी बरामद कर ली गई है।
सियासी और जमीन की रंजिश
एसएसपी श्रीधर पाटिल ने कहा कि यह सियासी रंजिश और जमीन के झगड़े को लेकर सामने आया यह मामला दुर्लभ में दुर्लभतम श्रेणी का है। एक गुट ने राजनीति और भूमि विवाद के अलावा विरोधी गुट की ओर दर्ज कराए गए मामले का हिसाब चुकता करने के लिए हत्याकांड कर डाला।