एक महीने के भीतर ही जंगलों में लगने वाली आग से सैकड़ों हेक्टेयर पर वन संपदा राख हो गई है। पिछले पांच साल में पहली बार इतनी भयानक आग लग रही है। सबसे ज्यादा आग का कहर राजोरी-पुंछ जिलों के एलओसी के पास वाले जंगलों पर बरपा है।
इसकी सबसे बड़ी वजह पीओके में लगने वाली आग की भारतीय सीमा में हुई घुसपैठ है। अधिकतर जंगलों में आग का कारण पीओके में लगने वाली आग है। दरअसल, दोनों जिलों की एलओसी पीओके के साथ लगती है। पीओके के जंगलों में आग लगने के बाद भारतीय सीमा तक पहुंचने के बाद जंगलों में पहुंच जाती है।
इस साल जम्मू संभाग में आग लगने से 11 जून तक 778.3 हेक्टेयर वन जलकर राख हो चुके हैं। जम्मू संभाग में कुल 337 घटनाएं जंगलों में आग लगने की हुई हैं। इनमें वन विभाग के जम्मू डिवीजन में 63, बिलावर मेें 45, रामनगर में 36 और बाकी की राजोरी-पुंछ में हुई हैं।
वर्ष 2015 में पूरे सीजन में 101 घटनाओं में 134.6 हेक्टेयर वन राख हुए। 2014 में 357 घटनाएं हुईं और 757 हेक्टेयर वनों को नुकसान हुआ। 2013 में 216 आग की घटनाएं हुईं और 472 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ। वन विभाग के अनुसार 15 जुलाई तक आग की घटनाएं होने की आशंका है। यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
1500 मुलाजिम सक्रिय
वन विभाग के मुख्य संरक्षक रोशन जग्गी का कहना है कि वन विभाग की अलग-अलग श्रेणी के 1500 से अधिक कर्मियों को वनों में आग लगने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए तैनात किया गया है। हरसंभव कोशिश की जा रही है। जो वन जल गए हैं, वहां पर नये पौधे लगाने पर काम शुरू होगा।