22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान ने नियोजित तरीके से मुजफ्फराबाद जिले में कबाइलियों को भेज कर सैकड़ों हिंदू और सिखों को मारा। तब की सरकार चाहती तो इस हमले को रोका जा सकता था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 69 वर्ष से सभी पीओके रिफ्यूजी अपने ही राज्य में पुनर्वास को तरस रहे हैं और सरकार की तरफ से केवल झूठे आश्वासन ही हासिल हुए हैं। यह बातें एसओएस इंटरनेशनल की तरफ से महेशपुरा चौक में आयोजित काला दिवस के कार्यक्रम में चेयरमैन राजीव चुन्नी ने कही।
काला दिवस पर सभी रिफ्यूजी बाजुओं पर काली पट्टियां बांध कर पहुंचे थे। आरंभ में सर्व धर्म प्रार्थना करके शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद सभी ने जमकर केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। राजीव चुन्नी ने कहा कि महाराजा हरि सिंह की सरकार के समय पहला हमला हुआ था।
उसके एक महीने के बाद मीरपुर में हमला किया गया, उस समय राज्य का भारत में विलय हो चुका था। सरकार चाहती दोनों हमले रोके जा सकते थे। हमले में हिंदू और सिख परिवारों ने हमलावरों का डटकर सामना किया था। हजारों परिवार बेघर हो गए और मुजफ्फराबाद को छोड़ कर राज्य सहित देश के विभिन्न हिस्सों में चले गए। सात दशक से यह परिवार परेशानियों से जूझते हुए जीवन जीने को मजबूर हैं।
'न केंद्र ने कुछ किया न राज्य ने'
प्रधानमंत्री और सीएम महबूबा मुफ्ती
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आज तक न तो राज्य सरकार ने पीओके रिफ्यूजियों के लिए कुछ किया न ही केंद्र सरकार ने। सरकार पीओके रिफ्यूजियों को आगे बढ़ने का कोई मौका नहीं दे रही है। ज्यादातर रिफ्यूजी बसों के कंडक्टर, ट्रकों के क्लीनर व दिहाड़ी करके काम करने को मजबूर हैं।
सरकार ने किसी को भी सरकारी नौकरी के लिए आरक्षण, स्कूल कालेज में शिक्षा के लिए सुविधाएं प्रदान नहीं की है। भाजपा सरकार सभी को 40 लाख रुपये प्रत्येक परिवार को पुनर्वास पैकेज देने का आश्वासन देती रही और जब पैकेज देने की बारी आई तो पांच लाख पर सब कुछ निपटा दिया गया।
'केंद्र सरकार की कथनी और करनी में फर्क'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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कार्यक्रम में दो प्रस्ताव भी पारित किए गए। पहले प्रस्ताव में वाइस चेयरमैन जेएस मंगल ने कहा कि केंद्र सरकार को पीओके को पाकिस्तान के कब्जे से छुड़वाना चाहिए और रिफ्यूजियों को पीओके में बसाने के लिए काम में तेजी लानी चाहिए। दूसरे प्रस्ताव में वाइस चेयरमैन एनएन शर्मा ने मांग की कि कश्मीर के विस्थापितों की तर्ज पर पीओके के विस्थापितों को भी सरकार की तरफ से सुविधाएं प्रदान की जाए। दोनों प्रस्तावों को जल्द प्रधानमंत्री के पास भेजा जाएगा।
राजीव चुन्नी ने कहा कि प्रधानमंत्री पीओके को भारत में वापस लाने की बात करते हैं, लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक के बाद उनका कहना था कि उनको पीओके की जमीन का लालच नहीं है, वे तो केवल आतंकियों को सबक सिखाना चाहते हैं। केंद्र सरकार की कथनी व करनी में बहुत अंतर है।