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सरपंचों एवं पंचों की की अनदेखी को लेकर त्यागपत्र के लिए चेताया

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मीरां साहिब। ऑल जम्मू-कश्मीर पंचायत कॉन्फ्रेंस के प्रदेश महासचिव तथा ब्लॉक मीरां साहिब के बीडीसी अध्यक्ष दिलीप कुमार ने मीरां साहिब में प्रेसवार्ता में कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में जनता द्वारा चुने सरपंचों एवं पंचों की सुनवाई नहीं हो रही है। अगर जल्द से जल्द प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने रवैए में बदलाव नहीं लाया तो जम्मू संभाग की विभिन्न पंचायतों के सरपंच त्यागपत्र देने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
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पत्रकारों से बातचीत में दिलीप कुमार ने कहा कि गत दिवस प्रशासनिक अधिकारियों से खफा होकर 50 के करीब सरपंचों ने त्यागपत्र दे दिया और अब वैसे ही हालात जम्मू संभाग की अन्य पंचायतों में बनते हुए दिख रहे हैं। महासचिव ने कहा कि कहने को तो सरकार ने सरपंचों को कई विभाग दिए हैं। इनमें सरपंचों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दुख की बात है कि जनता द्वारा चुने गए सरपंचों के प्रति प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भी अनदेखी की जा रही है। एक तरफ केंद्र सरकार जहां जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में पंचायती राज को मजबूत करने की बात कर रही है वहीं दूसरी तरफ सरपंच पूरी तरह से जम्मू-कश्मीर प्रशासन की अनदेखी से खफा हैं। उन्होंने पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों को लेकर ई-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू किए जाने पर विरोध जताया और कहा कि इस प्रक्रिया के कारण पंचायतों में विकास कार्य काफी धीमी गति के साथ जारी हैं, और ठेकेदार सरपंचों की राय लिए बिना ही पंचायतों में विकास कार्य करवा रहे हैं । उन्होंने कहा कि अब सरकार द्वारा के आदेश भी जारी कर दिया गया है कि सरपंचों के पास अपना जीएसटी भी होना चाहिए जोकि सरपंचों के साथ नाइंसाफी है क्योंकि उन्हें हर महीने इसकी फीस अदा करनी पड़ेगी । इस दौरान उन्होंने कहा कि खनन निकालने पर लगी पाबंदी के कारण भी पंचायतों में विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हुए हैं । दिलीप कुमार ने कहा कि तवी एवं नालों का कुछ भाग पंचायतों के हवाले होना चाहिए ताकि पंचायतों में विकास कार्य हो सके । उन्होंने साफ शब्दों में जम्मू-कश्मीर प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कुछ दिनों के भीतर भीतर प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने रवैए में बदलाव नहीं लाया तो सरपंच अपने पदों से त्यागपत्र देंगे जिसके लिए उप राज्यपाल पूरी तरह से जिम्मेदार होगे।
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